पटना: बिहार की राजनीति एक बार फिर करवट लेने को तैयार है। सूत्रों की मानें तो तेजस्वी यादव के करीबी और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामचंद्र पारस जल्द ही महागठबंधन (RJD गठबंधन) में शामिल हो सकते हैं। इस खबर ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। पारस अभी तक लोजपा (पारस गुट) के नेता रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ महीनों से वे सियासी रूप से निष्क्रिय नजर आ रहे थे। अब उनके महागठबंधन में आने की अटकलें तेज हो गई हैं।
पारस और तेजस्वी के बीच बढ़ती नजदीकियां
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि रामचंद्र पारस और तेजस्वी यादव के बीच पिछले कुछ हफ्तों में गुप्त बैठकों का दौर चला है। यह भी कहा जा रहा है कि पारस महागठबंधन में एक मजबूत भूमिका की मांग कर रहे हैं, जिसमें उन्हें दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व करने का प्रमुख चेहरा बनाया जा सकता है।
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तेजस्वी यादव लगातार कोशिश कर रहे हैं कि 2025 विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन को जातीय और सामाजिक रूप से और मजबूत किया जाए। ऐसे में पारस जैसे अनुभवी नेता की एंट्री से उन्हें बड़ा फायदा हो सकता है।
कौन हैं रामचंद्र पारस?
रामचंद्र पारस, लोक जनशक्ति पार्टी (पारस गुट) के प्रमुख नेता हैं और वे दिवंगत रामविलास पासवान के भाई हैं। उन्होंने नरेंद्र मोदी की सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में भी कार्य किया है। लेकिन चिराग पासवान और पारस गुट के बीच हुई सियासी जंग के बाद लोजपा दो भागों में बंट गई थी। उसके बाद से पारस की राजनीतिक पकड़ धीरे-धीरे कमजोर होती गई।
अब अगर वे महागठबंधन में शामिल होते हैं, तो यह उनकी राजनीतिक पुनरावृत्ति (political comeback) मानी जाएगी।
क्या यह बीजेपी के लिए झटका है?
बिलकुल। पारस फिलहाल एनडीए के सहयोगी माने जाते हैं। अगर वे महागठबंधन का हिस्सा बनते हैं, तो यह बीजेपी और चिराग पासवान दोनों के लिए सियासी झटका हो सकता है। खासकर पासवान वोट बैंक पर असर पड़ेगा, क्योंकि रामविलास पासवान का नाम अब भी दलित समुदाय में सम्मान से लिया जाता है।
महागठबंधन की रणनीति साफ है – अति पिछड़ा, दलित और मुस्लिम वर्ग को एकसाथ लाकर सामाजिक समीकरण बनाना। पारस की एंट्री इस रणनीति को और मजबूती दे सकती है।
आरजेडी को क्या फायदा मिलेगा?
1.दलित वोट बैंक में सेंध:
पारस की एंट्री से महागठबंधन को खासतौर से दलित मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका मिलेगा।
2.लोकसभा और विधानसभा दोनों में असर:
पारस लोकसभा सांसद रह चुके हैं। अगर वे महागठबंधन के टिकट पर फिर से मैदान में उतरते हैं, तो इसका असर राज्य की सीटों पर भी पड़ेगा।
3.सामाजिक समीकरण का संतुलन:
आरजेडी पर अक्सर यादव-मुस्लिम पार्टी का ठप्पा लगता रहा है। पारस जैसे नेता के आने से पार्टी अपनी छवि बदलने की कोशिश कर सकती है।
पारस की क्या शर्तें हैं?
सूत्रों के अनुसार, रामचंद्र पारस कुछ प्रमुख शर्तों के साथ महागठबंधन में शामिल होना चाहते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- उन्हें राज्यसभा या विधानसभा चुनाव में टिकट दिया जाए।
- उनकी पार्टी को महागठबंधन में एक मान्यता प्राप्त दल का दर्जा मिले।
- दलित कल्याण जैसे मुद्दों पर उन्हें प्रमुख भूमिका मिले।
तेजस्वी यादव इन शर्तों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं क्योंकि 2025 में मुकाबला सीधा बीजेपी से होगा।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
बीजेपी और चिराग पासवान गुट की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अंदरूनी हलकों में बेचैनी जरूर है। माना जा रहा है कि बीजेपी पारस को मनाने की कोशिश कर सकती है ताकि दलित वोटों का बिखराव न हो।
जनता की राय क्या कहती है?
सोशल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्ट्स से संकेत मिल रहे हैं कि जनता इस संभावित गठबंधन को लेकर उत्साहित है। खासकर दलित समुदाय में इसे एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर पारस महागठबंधन में आते हैं, तो बिहार में चिराग पासवान का ग्राफ गिर सकता है, क्योंकि अब उनका एकमात्र दलित चेहरा होना खत्म हो जाएगा।
निष्कर्ष
अगर रामचंद्र पारस महागठबंधन में शामिल होते हैं, तो यह 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एक बड़ा सियासी मोड़ साबित हो सकता है। इससे एक तरफ आरजेडी को जातीय समीकरण में बढ़त मिलेगी, वहीं एनडीए को रणनीति बदलनी पड़ेगी।अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वाकई में पारस आने वाले दिनों में तेजस्वी यादव के साथ मंच साझा करते नजर आएंगे?
FAQ Section
Q1. रामचंद्र पारस किस पार्टी से हैं?
A. वे लोजपा (पारस गुट) से हैं, जो एनडीए का हिस्सा रहा है।
Q2. क्या पारस महागठबंधन में शामिल होंगे?
A. सूत्रों के अनुसार, बातचीत अंतिम चरण में है और वे जल्द ही शामिल हो सकते हैं।
Q3. इससे किसे नुकसान होगा?
A. इससे चिराग पासवान और बीजेपी को नुकसान, जबकि तेजस्वी यादव को फायदा हो सकता है।
Q4. पारस को क्या भूमिका मिल सकती है?
A. उन्हें राज्यसभा, विधानसभा टिकट या दलित समाज की अगुवाई दी जा सकती है।
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