बोधगया में बिहार भूमि सर्वे कैंप: जमीन मालिकों को बड़ी राहत, रिकॉर्ड सुधार की प्रक्रिया तेज

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बोधगया (गया)। बिहार सरकार द्वारा राज्य-व्यापी भूमि सर्वे और भूमि रिकॉर्ड सुधार अभियान के तहत बोधगया प्रखंड में विशेष भूमि सर्वे कैंप का आयोजन किया गया। इस कैंप में बड़ी संख्या में किसान, जमीन मालिक और स्थानीय ग्रामीण शामिल हुए। शिविर का मुख्य उद्देश्य जमीन से जुड़े पुराने रिकॉर्ड को दुरुस्त करना, नामांतरण, जमाबंदी, बंटवारा और त्रुटि सुधार जैसी समस्याओं का समाधान करना रहा।

भूमि सर्वे कैंप को लेकर सुबह से ही लोगों में खासा उत्साह देखा गया। कई लोग अपने साथ जमीन से जुड़े दस्तावेज़ लेकर पहुंचे और अधिकारियों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याएं रखीं। प्रशासन की ओर से कहा गया कि इस तरह के कैंप का मकसद आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत देना और पारदर्शी तरीके से भूमि रिकॉर्ड को अपडेट करना है।

भूमि सर्वे कैंप का उद्देश्य और सरकार की मंशा

बिहार में लंबे समय से भूमि विवाद एक बड़ी समस्या रहे हैं। कई मामलों में जमीन से जुड़े दस्तावेज़ पुराने हैं या उनमें त्रुटियां पाई जाती हैं। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने विशेष भूमि सर्वे अभियान शुरू किया है। बोधगया में आयोजित यह कैंप उसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इस कैंप का मुख्य उद्देश्य जमीन के सही रिकॉर्ड तैयार करना है ताकि भविष्य में किसी भी तरह के विवाद से बचा जा सके। अधिकारियों ने बताया कि सर्वे के माध्यम से जमीन की वास्तविक स्थिति, सीमांकन और मालिकाना हक की पुष्टि की जा रही है। इससे न सिर्फ किसानों को फायदा मिलेगा बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ भी सही व्यक्ति तक पहुंच सकेगा।

सरकार का मानना है कि जब जमीन के रिकॉर्ड सही होंगे, तब निवेश, विकास कार्य और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं में भी तेजी आएगी। बोधगया जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल पर भूमि रिकॉर्ड का स्पष्ट होना विकास की दृष्टि से भी बेहद जरूरी माना जा रहा है।

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कैंप में क्या-क्या सेवाएं दी गईं, किन समस्याओं का हुआ समाधान

बोधगया भूमि सर्वे कैंप में लोगों को कई तरह की सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इसमें प्रमुख रूप से:

  • जमीन की जमाबंदी जांच और सुधार
  • नामांतरण (म्यूटेशन) से जुड़ी समस्याओं का समाधान
  • उत्तराधिकार के आधार पर जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव
  • बंटवारा और सीमांकन से जुड़े मामलों की जानकारी
  • पुराने खेसरा और खाता नंबर में सुधार

कई ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से उनके जमीन के कागजात में गलतियां थीं, जिन्हें सुधारने के लिए वे लगातार दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। कैंप में उन्हें एक ही स्थान पर अधिकारियों से मिलने और अपनी बात रखने का मौका मिला।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि जिन मामलों का तुरंत समाधान संभव नहीं था, उन्हें सूचीबद्ध कर आगे की कार्रवाई के लिए दर्ज किया गया। इससे लोगों को भरोसा मिला कि उनकी शिकायतों पर काम किया जाएगा और उन्हें अनदेखा नहीं किया जाएगा।

ग्रामीणों और किसानों की भागीदारी, मिला सीधा संवाद का अवसर

भूमि सर्वे कैंप में सबसे अहम बात यह रही कि ग्रामीणों और किसानों को अधिकारियों से सीधा संवाद करने का अवसर मिला। आमतौर पर जमीन से जुड़े मामलों में लोगों को दलालों या बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन इस कैंप में प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है।

कई किसानों ने बताया कि पहली बार उन्हें जमीन सर्वे और रिकॉर्ड सुधार की प्रक्रिया को विस्तार से समझने का मौका मिला। अधिकारियों ने सरल भाषा में बताया कि किन दस्तावेज़ों की जरूरत होती है और आवेदन कैसे किया जा सकता है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पंचायत स्तर के लोगों ने भी कैंप में भाग लिया और प्रशासन से आग्रह किया कि ऐसे शिविर नियमित रूप से लगाए जाएं। उनका कहना था कि इससे ग्रामीण इलाकों में जागरूकता बढ़ेगी और भूमि विवादों में कमी आएगी।

भविष्य की योजना और भूमि सर्वे से होने वाले फायदे

प्रशासन ने संकेत दिया है कि बोधगया के बाद गया जिले के अन्य प्रखंडों में भी इसी तरह के भूमि सर्वे कैंप लगाए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि तय समय सीमा के भीतर अधिकतम जमीन रिकॉर्ड को डिजिटल और त्रुटिरहित बनाया जाए।

भूमि सर्वे से होने वाले प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं:

  • जमीन से जुड़े विवादों में कमी
  • सरकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थी तक पहुंचना
  • जमीन खरीद-फरोख्त में पारदर्शिता
  • किसानों और जमीन मालिकों को कानूनी सुरक्षा
  • विकास कार्यों में तेजी

अधिकारियों का कहना है कि भूमि रिकॉर्ड सुधार से न सिर्फ आम जनता को फायदा होगा बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था भी मजबूत होगी। बोधगया जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल के लिए यह कदम और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आज का मौसम: भारत में बारिश, ठंड और बर्फबारी का अलर्ट | IMD Weather Update Today

आज भारत में बारिश और ठंड के मौसम के बीच छाता लेकर चलते लोग, शहर की सड़कों पर बदला हुआ मौसम

भारत में आज मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आ रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार देश के कई राज्यों में बारिश, गरज-चमक, तेज हवाएं और पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी की संभावना बनी हुई है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी मौसम का असर साफ देखा जा रहा है। सुबह और रात के समय ठंड बढ़ गई है, जबकि कुछ जगहों पर कोहरे की स्थिति भी बनी हुई है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, खासकर उन इलाकों में जहां बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है।

दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में बादल छाए रहने के साथ हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। वहीं मध्य भारत और कुछ हिस्सों में मौसम सामान्य बना हुआ है, लेकिन तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। दक्षिण भारत के तटीय इलाकों में भी हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। कुल मिलाकर आज का दिन मौसम के लिहाज से कई राज्यों के लिए अहम माना जा रहा है।

उत्तर भारत में मौसम का हाल: बारिश, ठंड और कोहरे का असर

उत्तर भारत में आज मौसम अपेक्षाकृत ठंडा बना हुआ है। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में सुबह के समय हल्का कोहरा देखने को मिला, जिससे दृश्यता प्रभावित हुई। दिन चढ़ने के साथ आसमान में बादल छाए रहे और कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी भी दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से अगले कुछ घंटों तक मौसम में बदलाव बना रह सकता है।

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आज बारिश की संभावना जताई गई है। खासकर पश्चिमी यूपी में बादल और ठंडी हवाओं का असर ज्यादा महसूस किया जा रहा है। न्यूनतम तापमान में गिरावट के कारण लोगों को सर्दी का एहसास हो रहा है। बिहार और झारखंड में भी मौसम का मिजाज बदला हुआ है। कुछ जिलों में हल्की बारिश और ठंडी हवाएं चलने से तापमान सामान्य से नीचे बना हुआ है।

पंजाब और हरियाणा में भी आज मौसम ठंडा रहने का अनुमान है। यहां पर बारिश के साथ-साथ तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे फसलों को नुकसान की आशंका भी जताई जा रही है। राजस्थान के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में बादल छाए रहने और कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना है। पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी का दौर जारी रह सकता है, जिससे सड़कों पर फिसलन बढ़ने की आशंका है।

पहाड़ी और मध्य भारत में मौसम की स्थिति

हिमालयी क्षेत्रों में आज मौसम और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में बर्फबारी की संभावना बनी हुई है। इससे तापमान में और गिरावट देखने को मिल सकती है। कई इलाकों में सड़कों के बंद होने और यातायात प्रभावित होने की खबरें भी सामने आ सकती हैं। प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

मध्य भारत की बात करें तो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में मौसम शुष्क बना हुआ है, लेकिन रात के समय ठंड बढ़ गई है। न्यूनतम तापमान में गिरावट के कारण सुबह और देर रात ठंड का असर साफ देखा जा रहा है। कुछ इलाकों में हल्की ठंडी हवाएं चलने से मौसम सुहावना बना हुआ है।

महाराष्ट्र में भी मौसम मिला-जुला बना हुआ है। विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र में सुबह और रात के समय हल्की ठंड महसूस की जा रही है, जबकि दिन में मौसम सामान्य रहता है। पश्चिमी महाराष्ट्र और मुंबई जैसे तटीय क्षेत्रों में हल्की नमी के साथ मौसम स्थिर बना हुआ है। कुल मिलाकर मध्य भारत में मौसम फिलहाल गंभीर नहीं है, लेकिन तापमान में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

दक्षिण और पूर्वी भारत में मौसम और IMD की सलाह

दक्षिण भारत में आज मौसम सामान्य से हल्का बदला हुआ नजर आ रहा है। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश के आसार बने हुए हैं। तटीय इलाकों में बादल छाए रहने और हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। हालांकि भारी बारिश की चेतावनी फिलहाल नहीं है, लेकिन समुद्र के पास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

पूर्वी भारत की बात करें तो पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम के कुछ इलाकों में मौसम सामान्य बना हुआ है। हालांकि सुबह और रात के समय ठंड का असर महसूस किया जा रहा है। तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे सर्दी का एहसास बढ़ गया है। कुछ इलाकों में हल्का कोहरा भी देखा जा सकता है।

भारतीय मौसम विभाग ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखें। जिन इलाकों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना है, वहां बाहर निकलते समय सावधानी बरतें। पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने से पहले स्थानीय प्रशासन की सलाह जरूर लें। किसानों को भी मौसम को ध्यान में रखते हुए फसल संबंधी फैसले लेने की सलाह दी गई है।आज भारत के कई राज्यों में मौसम बदला-बदला नजर आ रहा है। कहीं बारिश और ठंड का असर है तो कहीं हल्की बर्फबारी ने तापमान गिरा दिया है। आने वाले दिनों में भी मौसम में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना और सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

PM Kisan 22वीं किस्त 2026: किसानों के खाते में कब आएंगे ₹2000, जानिए पूरी जानकारी

PM Kisan 22nd Installment

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना देश के करोड़ों किसानों के लिए एक मजबूत यादगार सहारा बन चुकी है। इस योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को हर साल आर्थिक सहायता दी जाती है ताकि खेती से जुड़े खर्चों को आसानी से पूरा किया जा सके। अब किसान PM Kisan 22वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि पिछली किस्त के बाद अगली राशि इसी से जुड़ी है।

सरकार द्वारा अब तक 21 किस्तें जारी की जा चुकी हैं और अब चर्चा में है 22वीं किस्त, जिसमें किसानों के बैंक खाते में ₹2000 सीधे ट्रांसफर किए जाएंगे। इस खबर में हम आपको 22वीं किस्त से जुड़ी हर जरूरी जानकारी आसान भाषा में बता रहे हैं।

पीएम किसान सम्मान निधि योजना क्या है? (योजना का उद्देश्य और लाभ)

PM Kisan Samman Nidhi Yojana केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसकी शुरुआत किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को प्रति वर्ष ₹6000 की सहायता दी जाती है, जिसे तीन बराबर किस्तों में बांटा गया है।

हर चार महीने में किसानों को ₹2000 की एक किस्त उनके बैंक खाते में Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से भेजी जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि किसानों को खेती के लिए बीज, खाद, दवा, सिंचाई और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए आर्थिक मदद मिल सके।

यह योजना खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए बनाई गई है, जिनके पास सीमित कृषि भूमि है। योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पैसा सीधे किसान के खाते में जाता है, जिससे किसी तरह की बिचौलिया व्यवस्था खत्म होती है और पारदर्शिता बनी रहती है।

PM Kisan 22वीं किस्त कब आएगी? (संभावित तारीख और अपडेट)

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि PM Kisan 22वीं किस्त कब आएगी। सरकार ने अभी तक 22वीं किस्त की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन पिछले वर्षों के ट्रेंड और सरकारी प्रक्रिया को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि यह किस्त फरवरी से मार्च 2026 के बीच जारी की जा सकती है।

21वीं किस्त नवंबर 2025 में जारी की गई थी। आमतौर पर PM किसान की किस्तें हर चार महीने के अंतराल पर आती हैं। इसी पैटर्न को देखते हुए 22वीं किस्त का समय तय माना जा रहा है।कई बार किस्त जारी होने से पहले सरकार लाभार्थियों का डेटा वेरिफिकेशन करती है, जिसमें e-KYC, बैंक डिटेल और भूमि रिकॉर्ड की जांच की जाती है। इसी कारण कभी-कभी किस्त आने में थोड़ी देरी भी हो सकती है।किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक अपडेट पर भरोसा करें। जैसे ही सरकार की ओर से घोषणा होगी, उसी समय पैसा किसानों के खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

Bihar Bhumi: बिहार में दाखिल-खारिज प्रक्रिया अब आसान, जानिए पूरी जानकारी और जरूरी दस्तावेज

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PATNA: बिहार में जमीन से जुड़े मामलों को लेकर लोगों को अक्सर कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता रहा है। जमीन खरीदने, बेचने, दान देने या किसी परिजन की मृत्यु के बाद संपत्ति के हस्तांतरण की स्थिति में सबसे जरूरी प्रक्रिया होती है दाखिल-खारिज। इसी प्रक्रिया के जरिए सरकारी रिकॉर्ड में जमीन के मालिक का नाम बदला जाता है। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने दाखिल-खारिज से जुड़े नियमों को स्पष्ट करते हुए आम लोगों के लिए प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया है। अब सही दस्तावेज और निर्धारित प्रक्रिया के तहत दाखिल-खारिज कराना अपेक्षाकृत आसान हो गया है, जिससे जमीन से जुड़े विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है।

दाखिल-खारिज केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि जमीन के कानूनी स्वामित्व का आधार होता है। यदि किसी व्यक्ति ने जमीन खरीद ली है लेकिन दाखिल-खारिज नहीं कराया, तो सरकारी रिकॉर्ड में वह जमीन अब भी पुराने मालिक के नाम दर्ज रहती है। ऐसे में भविष्य में जमीन बेचने, बैंक लोन लेने या किसी सरकारी योजना का लाभ उठाने में परेशानी हो सकती है। यही कारण है कि बिहार सरकार लगातार लोगों को दाखिल-खारिज के प्रति जागरूक कर रही है और ऑनलाइन सिस्टम के जरिए इसे सुगम बनाने पर जोर दे रही है।

दाखिल-खारिज क्या है और यह क्यों जरूरी है

दाखिल-खारिज का अर्थ है भूमि अभिलेखों में मालिक के नाम में बदलाव करना। सरल शब्दों में कहें तो जब भी जमीन का स्वामित्व एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को स्थानांतरित होता है, तो उस बदलाव को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराने की प्रक्रिया को दाखिल-खारिज कहा जाता है। यह प्रक्रिया जमीन खरीद-बिक्री, दान, बंटवारा, उत्तराधिकार या वसीयत के मामलों में अनिवार्य होती है।

बिहार में दाखिल-खारिज का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि जमीन से जुड़े अधिकतर विवाद गलत या पुराने रिकॉर्ड की वजह से पैदा होते हैं। अगर समय पर दाखिल-खारिज करा लिया जाए, तो भविष्य में किसी भी तरह के विवाद की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। सरकारी रिकॉर्ड में नाम अपडेट होने से यह स्पष्ट हो जाता है कि जमीन का वास्तविक मालिक कौन है।

दाखिल-खारिज न कराने की स्थिति में जमीन का नया मालिक कई कानूनी अधिकारों से वंचित रह सकता है। उदाहरण के तौर पर, बैंक से कृषि ऋण या होम लोन लेने में दिक्कत आती है, क्योंकि बैंक सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर ही जमीन के स्वामित्व की पुष्टि करते हैं। इसके अलावा, सरकारी मुआवजा, भूमि अधिग्रहण से जुड़ा भुगतान या किसी योजना का लाभ भी सही रिकॉर्ड के बिना नहीं मिल पाता।

बिहार सरकार ने डिजिटल इंडिया की दिशा में कदम बढ़ाते हुए Bihar Bhumi पोर्टल के माध्यम से दाखिल-खारिज प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। इससे लोगों को अंचल कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत कम हुई है और आवेदन की स्थिति को ऑनलाइन ट्रैक करना भी संभव हो गया है।

दाखिल-खारिज के लिए जरूरी दस्तावेजों की पूरी जानकारी

दाखिल-खारिज कराने के लिए सही और वैध दस्तावेजों का होना सबसे जरूरी शर्त है। दस्तावेजों के आधार पर ही यह तय किया जाता है कि जमीन का स्वामित्व किसे दिया जाना है। अलग-अलग परिस्थितियों में आवश्यक दस्तावेज भी अलग-अलग हो सकते हैं।

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यदि जमीन खरीद-बिक्री, दान या अदला-बदली के माध्यम से प्राप्त की गई है, तो सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है रजिस्टर्ड डीड या इंडेक्स डीड। यह दस्तावेज इस बात का प्रमाण होता है कि जमीन का लेन-देन कानून के अनुसार हुआ है और उस पर स्टांप ड्यूटी का भुगतान किया गया है। बिना रजिस्टर्ड डीड के दाखिल-खारिज आवेदन स्वीकार नहीं किया जाता।

अगर मामला जमीन के बंटवारे से जुड़ा है, तो इसके लिए दो तरह के दस्तावेज मान्य होते हैं। पहला, आपसी सहमति से किया गया रजिस्टर्ड बंटवारा डीड, और दूसरा, सक्षम न्यायालय द्वारा जारी बंटवारे का आदेश। इन दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि किस हिस्से पर किस व्यक्ति का अधिकार है और उसी आधार पर रिकॉर्ड में नाम दर्ज किया जाता है।

उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में, यानी किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके वारिस को जमीन मिलने की स्थिति में, उत्तराधिकार से संबंधित दस्तावेज जरूरी होते हैं। इसमें परिवार का बंटवारा शेड्यूल, वंशावली या अन्य संबंधित कागजात शामिल हो सकते हैं। वहीं, अगर जमीन इच्छापत्र (Will) के आधार पर दी गई है, तो उस स्थिति में उत्तराधिकार प्रमाणपत्र या सक्षम प्राधिकारी द्वारा मान्य वसीयत प्रस्तुत करनी होती है।

कुछ मामलों में जमीन से जुड़ा विवाद न्यायालय में लंबित होता है या पहले से किसी कोर्ट केस का हिस्सा रहा होता है। ऐसी स्थिति में दाखिल-खारिज के लिए कोर्ट का आदेश अनिवार्य हो सकता है। इसके साथ ही जमीन की लगान रसीद भी देनी होती है, जिससे यह साबित हो सके कि जमीन का राजस्व समय पर जमा किया जा रहा है।

इसके अलावा, पहचान सत्यापन के लिए खरीदने वाले और बेचने वाले दोनों का आधार कार्ड भी जरूरी दस्तावेजों में शामिल है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि सही व्यक्ति के नाम पर ही जमीन का रिकॉर्ड अपडेट किया जा रहा है और किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके।

दाखिल-खारिज प्रक्रिया आसान होने से लोगों को क्या फायदा

बिहार सरकार द्वारा दाखिल-खारिज प्रक्रिया को सरल और ऑनलाइन बनाए जाने से आम लोगों को कई तरह के फायदे मिल रहे हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए अंचल कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। ऑनलाइन आवेदन के जरिए घर बैठे ही प्रक्रिया शुरू की जा सकती है और आवेदन की स्थिति भी पोर्टल पर देखी जा सकती है।

दाखिल-खारिज समय पर कराने से जमीन से जुड़े भविष्य के विवादों में काफी कमी आती है। सरकारी रिकॉर्ड में जब सही मालिक का नाम दर्ज होता है, तो किसी भी तरह की दोहरी दावेदारी या फर्जी दस्तावेज के जरिए जमीन हड़पने की संभावना कम हो जाती है। इससे ग्रामीण इलाकों में अक्सर होने वाले भूमि विवादों पर भी अंकुश लग सकता है।

इसके अलावा, सही रिकॉर्ड होने से जमीन का उपयोग आर्थिक रूप से भी आसान हो जाता है। किसान आसानी से कृषि ऋण ले सकते हैं, जमीन के बदले बैंक से लोन मिल सकता है और सरकारी योजनाओं का लाभ भी बिना किसी अड़चन के मिल पाता है। भूमि अधिग्रहण की स्थिति में मुआवजा भी सीधे वास्तविक मालिक को मिलता है।

सरकार के लिए भी यह प्रक्रिया फायदेमंद है, क्योंकि इससे राजस्व रिकॉर्ड अपडेट रहते हैं और टैक्स वसूली में पारदर्शिता आती है।डिजिटल रिकॉर्ड के कारण भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी कम होती हैं और पूरी प्रक्रिया अधिक भरोसेमंद बनती है।

कुल मिलाकर, दाखिल-खारिज की आसान प्रक्रिया न केवल जमीन मालिकों के लिए राहत लेकर आई है, बल्कि बिहार में भूमि प्रशासन को भी अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद कर रही है। अगर किसी ने हाल ही में जमीन खरीदी है या उसे उत्तराधिकार में संपत्ति मिली है, तो समय रहते दाखिल-खारिज कराना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की कानूनी परेशानी से बचा जा सके।

19 से 25 दिसंबर तक बदलेगा मौसम! बिहार–UP में ठंड और कोहरे का अलर्ट, जानें पूरा हाल

19 से 25 दिसंबर तक बिहार और उत्तर प्रदेश का मौसम, ठंड और कोहरा

19 दिसंबर से बिहार के मौसम में ठंड का असर साफ तौर पर देखने को मिलेगा। उत्तर भारत से आने वाली ठंडी हवाओं के कारण राज्य के अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर, पूर्णिया और छपरा जैसे जिलों में सुबह और देर रात ठंड ज्यादा महसूस होगी। खासकर ग्रामीण इलाकों में ठिठुरन बढ़ने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, इस दौरान आसमान अधिकतर साफ रहेगा, लेकिन सुबह के समय धुंध और हल्का से मध्यम कोहरा देखने को मिल सकता है।

20 और 21 दिसंबर को बिहार के कई हिस्सों में कोहरा थोड़ा घना हो सकता है, जिससे सुबह के समय दृश्यता कम हो सकती है। इसका असर सड़क यातायात, ट्रेन संचालन और स्कूल जाने वाले बच्चों पर पड़ सकता है। हालांकि दोपहर होते-होते कोहरा धीरे-धीरे छंट जाएगा और धूप निकलने से मौसम सामान्य महसूस होगा। दिन का तापमान 22 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है, जबकि रात का तापमान 9 से 12 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है।

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22 से 25 दिसंबर के बीच बिहार के मौसम में ज्यादा बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। ठंडी उत्तर-पश्चिमी हवाएं चलती रहेंगी, जिससे सुबह और शाम ठंड बनी रहेगी। कुछ जिलों में हल्के बादल छा सकते हैं, लेकिन बारिश की संभावना बहुत कम मानी जा रही है। किसान वर्ग के लिए यह मौसम रबी फसलों के लिहाज से अनुकूल माना जा रहा है, क्योंकि न ज्यादा बारिश होगी और न ही अत्यधिक ठंड का प्रकोप देखने को मिलेगा। हालांकि सुबह-सुबह खेतों में काम करने वालों को ठंड से बचाव के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

उत्तर प्रदेश में 19 से 25 दिसंबर तक मौसम का हाल

उत्तर प्रदेश में 19 दिसंबर से मौसम धीरे-धीरे सर्द होता चला जाएगा। पश्चिमी यूपी, मध्य यूपी और पूर्वी यूपी—तीनों हिस्सों में ठंड का असर अलग-अलग रूप में देखने को मिल सकता है। लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, आगरा, मेरठ और नोएडा जैसे शहरों में सुबह के समय कोहरा और ठंडी हवा लोगों को परेशान कर सकती है। खासकर 19, 20 और 21 दिसंबर को सुबह के समय दृश्यता काफी कम रहने की संभावना जताई जा रही है।

दिन के समय धूप निकलने से थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन शाम ढलते ही ठंड का असर फिर से बढ़ जाएगा। पश्चिमी यूपी में रात का तापमान 7 से 10 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है, जबकि पूर्वी यूपी में यह 9 से 12 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। दिन का तापमान 20 से 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। इस दौरान बारिश के आसार नहीं के बराबर हैं, जिससे ठंड शुष्क बनी रहेगी।

22 से 25 दिसंबर के बीच उत्तर प्रदेश में मौसम लगभग इसी तरह बना रह सकता है। सुबह के समय कोहरा, दोपहर में हल्की धूप और शाम-रात में ठंड—यही मौसम का मुख्य पैटर्न रहेगा। कुछ जिलों में सर्द हवाओं की रफ्तार बढ़ सकती है, जिससे ठंड का असर और ज्यादा महसूस होगा। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को इस दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। ठंड के कारण सर्दी-खांसी और वायरल जैसी समस्याओं में बढ़ोतरी भी देखने को मिल सकती है।

कोहरा, ठंड और हवाओं का असर: आम जनजीवन पर प्रभाव

19 से 25 दिसंबर के बीच बिहार और उत्तर प्रदेश—दोनों ही राज्यों में कोहरा सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है। सुबह के समय हाईवे, ग्रामीण सड़कें और रेलवे ट्रैक कोहरे की चपेट में रह सकते हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। ट्रेनें और बसें भी देरी से चल सकती हैं, जिसका असर रोजमर्रा के यात्रियों पर पड़ेगा। खासकर दफ्तर जाने वाले लोगों और छात्रों को सुबह के समय अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलने की जरूरत होगी।

ठंडी हवाओं के कारण सुबह-शाम तापमान में गिरावट से ठिठुरन बढ़ेगी। खुले इलाकों, खेतों और नदी किनारे बसे क्षेत्रों में ठंड ज्यादा महसूस हो सकती है। ग्रामीण इलाकों में अलाव जलाने की जरूरत बढ़ सकती है। वहीं शहरों में लोग गर्म कपड़ों, स्वेटर, जैकेट और शॉल का सहारा लेते नजर आएंगे। बाजारों में भी ऊनी कपड़ों की मांग बढ़ने की संभावना है।

स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह समय संवेदनशील माना जा रहा है। ठंड और कोहरे के कारण सांस से जुड़ी समस्याएं, दमा, सर्दी-खांसी और बुखार जैसी शिकायतें बढ़ सकती हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि लोग सुबह-शाम ठंडी हवा से बचें, पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें और बच्चों व बुजुर्गों का खास ख्याल रखें। खुले में सुबह की सैर करने वालों को भी सूरज निकलने के बाद ही बाहर निकलने की सलाह दी जाती है।

किसानों, यात्रियों और आम लोगों के लिए जरूरी सलाह

19 से 25 दिसंबर के मौसम को देखते हुए किसानों के लिए यह समय कुल मिलाकर अनुकूल माना जा रहा है। रबी की फसलों जैसे गेहूं, सरसों और चना के लिए ठंडी रातें फायदेमंद साबित हो सकती हैं। हालांकि सुबह के समय अधिक नमी और कोहरे के कारण फसलों में रोग लगने की संभावना भी रहती है, इसलिए किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी जाती है। सिंचाई का समय दिन में रखना बेहतर होगा ताकि फसलों पर ठंड का ज्यादा असर न पड़े।

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यात्रियों के लिए सबसे बड़ी सलाह यही है कि सुबह-सुबह सफर करते समय सावधानी बरतें। कोहरे में वाहन चलाते समय धीमी गति रखें, फॉग लाइट का इस्तेमाल करें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें। ट्रेन या बस से यात्रा करने वालों को समय से पहले घर से निकलना चाहिए, क्योंकि देरी की संभावना बनी रह सकती है। हवाई यात्रा करने वालों को भी फ्लाइट की स्थिति पहले जांचने की सलाह दी जाती है।

आम लोगों के लिए जरूरी है कि ठंड से बचाव के पूरे इंतजाम रखें। सुबह-शाम गर्म कपड़े पहनें, बच्चों को ठंडी हवा से बचाएं और पर्याप्त गर्म भोजन करें। गर्म पानी पीना और सर्दी-खांसी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करना बेहद जरूरी है। कुल मिलाकर 19 से 25 दिसंबर के बीच बिहार और उत्तर प्रदेश में मौसम सर्द रहेगा, लेकिन थोड़ी सावधानी बरतकर लोग इस मौसम का सामना आसानी से कर सकते हैं।

Farmer Registry Bihar: बिहार के किसानों के लिए बड़ा फैसला, फार्मर रजिस्ट्री से बनेगी फार्मर आईडी, योजनाओं का लाभ होगा आसान

बिहार में फार्मर रजिस्ट्री के तहत किसान आईडी बनाते किसान

बिहार सरकार के कृषि विभाग ने राज्य के किसानों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब किसानों की जमीन, फसल और योजनाओं से जुड़ी जानकारी को फार्मर रजिस्ट्री के तहत एकत्र किया जाएगा, जिससे प्रत्येक किसान की यूनिक फार्मर आईडी बनाई जाएगी। इस पहल का उद्देश्य किसानों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिलाना, पारदर्शिता बढ़ाना और फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगाना है।कृषि विभाग के अनुसार, फार्मर रजिस्ट्री लागू होने के बाद किसानों से जुड़ा डेटा व्यवस्थित होगा और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। यह व्यवस्था भविष्य की कृषि नीतियों और योजना निर्माण में भी अहम भूमिका निभाएगी।

फार्मर रजिस्ट्री क्या है, इससे किसानों को क्या होगा फायदा

फार्मर रजिस्ट्री एक डिजिटल डेटाबेस सिस्टम है, जिसमें राज्य के प्रत्येक किसान की व्यक्तिगत और कृषि संबंधी जानकारी दर्ज की जाएगी। इसमें किसान का नाम, पता, जमीन का विवरण, फसल का प्रकार, बैंक खाता और आधार से जुड़ी जानकारियाँ शामिल होंगी।

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इस रजिस्ट्री के तहत हर किसान को एक फार्मर आईडी नंबर मिलेगा, जो उसकी पहचान बनेगा। इसके जरिए किसान को बार-बार दस्तावेज देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकारी योजनाओं में आवेदन करते समय फार्मर आईडी ही पर्याप्त होगी।

कृषि विभाग का मानना है कि अब तक कई योजनाओं में सही किसानों तक लाभ नहीं पहुंच पाता था। कहीं डेटा अधूरा होता था, तो कहीं गलत जानकारी के कारण पात्र किसान वंचित रह जाते थे। फार्मर रजिस्ट्री इस समस्या का स्थायी समाधान साबित हो सकती है।

फार्मर रजिस्ट्री से किसानों को मिलने वाले प्रमुख लाभ:

  • सभी योजनाओं का लाभ एक ही आईडी से
  • फर्जी और दोहरे लाभार्थियों पर रोक
  • योजनाओं की राशि सीधे बैंक खाते में
  • समय की बचत और प्रक्रिया में पारदर्शिता
  • छोटे और सीमांत किसानों की पहचान आसान

सरकार का लक्ष्य है कि राज्य का कोई भी पात्र किसान योजनाओं से वंचित न रहे।

ग्राम स्तर पर लगेगा कैंप, ऐसे बनेगी फार्मर आईडी

फार्मर आईडी बनाने के लिए कृषि विभाग द्वारा ग्रामवार रजिस्ट्रेशन कैंप लगाए जाएंगे। इन कैंपों में कृषि समन्वयक, कृषि सलाहकार और अन्य कर्मचारी मौजूद रहेंगे, जो किसानों का पंजीकरण करेंगे।

कैंप में किसान से निम्न दस्तावेज लिए जाएंगे:

  • आधार कार्ड
  • जमीन से जुड़े कागजात
  • बैंक पासबुक
  • मोबाइल नंबर

इन दस्तावेजों के आधार पर किसान की जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जाएगी और सत्यापन के बाद फार्मर आईडी जनरेट की जाएगी। जिन किसानों के पास डिजिटल साधनों की जानकारी नहीं है, उनके लिए यह कैंप बेहद उपयोगी साबित होंगे।

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कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि फार्मर आईडी बनवाने में किसानों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया सरकार द्वारा निःशुल्क कराई जाएगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के लिए पंचायत स्तर पर प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसान इस योजना से जुड़ सकें।

योजनाओं का लाभ, नीति निर्माण और कृषि व्यवस्था होगी मजबूत

फार्मर रजिस्ट्री लागू होने के बाद बिहार की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, बीज अनुदान, खाद सब्सिडी और आपदा राहत जैसी योजनाओं का लाभ सीधे फार्मर आईडी से लिंक होकर मिलेगा।

इसके साथ ही सरकार को यह भी स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी कि:

  • किस क्षेत्र में कौन-सी फसल उगाई जा रही है
  • किस किसान को पहले से कौन-सा लाभ मिला है
  • किन जिलों में सहायता की अधिक जरूरत है

इस डेटा के आधार पर सरकार बेहतर नीतियाँ बना सकेगी और संसाधनों का सही उपयोग हो पाएगा।कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फार्मर रजिस्ट्री भविष्य में कृषि से जुड़े सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म का आधार बनेगी। इससे खेती को आधुनिक और डेटा आधारित बनाने में मदद मिलेगी।

किसान कॉल सेंटर से लें सहायता

फार्मर रजिस्ट्री या फार्मर आईडी से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए किसान किसान कॉल सेंटर पर संपर्क कर सकते हैं।किसान कॉल सेंटर नंबर: 1800-180-1551 समय: सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक|

RRB Group D Exam City & Admit Card 2025 जारी होने वाला है! जानें डेट, डाउनलोड लिंक और जरूरी अपडेट

RRB Group D Exam City Slip and Admit Card 2025 latest update

रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) द्वारा आयोजित Group D भर्ती परीक्षा 2025 को लेकर देशभर के करोड़ों अभ्यर्थी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह परीक्षा भारतीय रेलवे की सबसे बड़ी भर्तियों में से एक मानी जाती है, जिसमें ट्रैक मेंटेनर, हेल्पर, असिस्टेंट पॉइंट्समैन, हॉस्पिटल असिस्टेंट जैसे पदों पर नियुक्ति की जाती है। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब उम्मीदवारों की नजर Exam City Intimation Slip और Admit Card 2025 पर टिकी हुई है। जैसे-जैसे परीक्षा तिथि नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे RRB Group D से जुड़े अपडेट्स तेजी से सर्च किए जा रहे हैं।इस भर्ती प्रक्रिया में Exam City Slip और Admit Card दोनों का अलग-अलग महत्व होता है। कई उम्मीदवार इनके बीच का अंतर नहीं समझ पाते, जिससे भ्रम की स्थिति बन जाती है। इस खबर में हम आपको RRB Group D Exam City Slip 2025, Admit Card 2025, डाउनलोड प्रक्रिया, जरूरी निर्देश और परीक्षा से जुड़ी हर अहम जानकारी विस्तार से बता रहे हैं।

RRB Group D Exam City Slip 2025: क्या होती है और क्यों है जरूरी

RRB Group D Exam City Slip को City Intimation Slip भी कहा जाता है। यह एक तरह की पूर्व सूचना होती है, जिसके माध्यम से रेलवे भर्ती बोर्ड उम्मीदवारों को यह जानकारी देता है कि उनकी परीक्षा किस शहर में आयोजित की जाएगी। यह स्लिप परीक्षा से कुछ दिन पहले जारी की जाती है ताकि अभ्यर्थी यात्रा और रहने की व्यवस्था समय पर कर सकें।

Exam City Slip में उम्मीदवार को परीक्षा शहर के साथ-साथ परीक्षा की संभावित तिथि और शिफ्ट (सुबह या शाम) की जानकारी दी जाती है। हालांकि, इसमें परीक्षा केंद्र का पूरा पता नहीं दिया जाता। यही कारण है कि Exam City Slip को अक्सर Admit Card समझ लिया जाता है, जबकि दोनों पूरी तरह अलग दस्तावेज हैं।

रेलवे भर्ती बोर्ड आमतौर पर परीक्षा से 10 से 12 दिन पहले Exam City Intimation Slip जारी करता है। इसका मुख्य उद्देश्य उम्मीदवारों को पहले से मानसिक और व्यावहारिक रूप से तैयार करना होता है, खासकर उन अभ्यर्थियों के लिए जो दूसरे राज्यों या दूरदराज के शहरों से परीक्षा देने जाते हैं। Exam City Slip आने के बाद उम्मीदवार अपनी यात्रा टिकट, होटल या अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं आसानी से कर सकते हैं।

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि Exam City Slip सिर्फ सूचना के लिए होती है। परीक्षा केंद्र में प्रवेश के लिए इसे मान्य दस्तावेज नहीं माना जाता। इसलिए उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे Exam City Slip डाउनलोड करने के बाद भी Admit Card जारी होने का इंतजार जरूर करें।

RRB Group D Admit Card 2025: कब आएगा और इसमें क्या-क्या होगा

RRB Group D Admit Card 2025 परीक्षा में शामिल होने के लिए सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। बिना Admit Card के किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाता। रेलवे भर्ती बोर्ड आमतौर पर Admit Card परीक्षा से 3 से 4 दिन पहले जारी करता है।

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Admit Card में उम्मीदवार से जुड़ी कई अहम जानकारियां होती हैं, जिनमें उम्मीदवार का नाम, रोल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, परीक्षा की तारीख, शिफ्ट, रिपोर्टिंग टाइम और परीक्षा केंद्र का पूरा पता शामिल होता है। इसके अलावा Admit Card पर उम्मीदवार की फोटो और हस्ताक्षर भी होते हैं, जिससे पहचान सत्यापित की जा सके।

RRB Group D Admit Card में परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए जाते हैं, जैसे परीक्षा केंद्र पर कितने बजे पहुंचना है, कौन-कौन से दस्तावेज साथ लाने हैं और किन वस्तुओं पर प्रतिबंध रहेगा। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे Admit Card डाउनलोड करने के बाद उसमें दी गई सभी जानकारियों को ध्यान से जांच लें। यदि किसी प्रकार की गलती नजर आती है, तो तुरंत संबंधित RRB से संपर्क करें।

Admit Card केवल ऑनलाइन माध्यम से ही जारी किया जाता है। रेलवे भर्ती बोर्ड किसी भी उम्मीदवार को डाक या अन्य माध्यम से Admit Card नहीं भेजता। इसलिए सभी उम्मीदवारों को अपने रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्मतिथि को संभालकर रखना चाहिए, ताकि डाउनलोड के समय किसी तरह की परेशानी न हो।

RRB Group D Exam City Slip & Admit Card 2025 कैसे डाउनलोड करें

RRB Group D Exam City Slip और Admit Card डाउनलोड करने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होती है और इसे कोई भी उम्मीदवार घर बैठे आसानी से पूरा कर सकता है। सबसे पहले उम्मीदवार को अपने संबंधित रीजनल RRB की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होता है, क्योंकि सभी RRB अपनी-अपनी वेबसाइट पर ही नोटिस और लिंक जारी करते हैं।

वेबसाइट के होमपेज पर “RRB Group D Exam City Intimation Slip 2025” या “RRB Group D Admit Card 2025” से संबंधित लिंक दिखाई देगा। उम्मीदवार को उस लिंक पर क्लिक करना होगा। इसके बाद एक नया पेज खुलेगा, जहां उम्मीदवार से रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्मतिथि या पासवर्ड दर्ज करने के लिए कहा जाएगा।

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सही जानकारी भरने के बाद जैसे ही उम्मीदवार सबमिट बटन पर क्लिक करेगा, स्क्रीन पर उसकी Exam City Slip या Admit Card दिखाई देगा। उम्मीदवार इसे PDF फॉर्मेट में डाउनलोड कर सकता है और भविष्य के लिए इसका प्रिंटआउट निकाल सकता है। परीक्षा के दिन कम से कम दो प्रिंट कॉपी साथ रखना बेहतर माना जाता है।

उम्मीदवारों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि Admit Card और Exam City Slip केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही डाउनलोड करें। किसी भी अनधिकृत वेबसाइट या लिंक पर भरोसा न करें, क्योंकि इससे गलत जानकारी मिलने या धोखाधड़ी का खतरा हो सकता है।

RRB Group D परीक्षा 2025 से जुड़े जरूरी निर्देश और उम्मीदवारों के लिए सलाह

RRB Group D परीक्षा देश के विभिन्न शहरों में आयोजित की जाती है और इसमें लाखों उम्मीदवार शामिल होते हैं। ऐसे में रेलवे भर्ती बोर्ड परीक्षा को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए सख्त नियम लागू करता है। परीक्षा के दिन उम्मीदवारों को समय से पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि देर से पहुंचने वाले उम्मीदवारों को प्रवेश नहीं दिया जाता।

परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर या किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट ले जाना सख्त मना होता है। इसके अलावा कागज, किताब, नोट्स या किसी भी प्रकार की स्टडी मटेरियल ले जाने की अनुमति नहीं होती। उम्मीदवार केवल Admit Card और एक वैध फोटो पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी या पैन कार्ड ही साथ ले जा सकते हैं।

उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे Exam City Slip मिलने के बाद ही यात्रा की योजना बनाएं और Admit Card आने के बाद परीक्षा केंद्र का पूरा पता ध्यान से पढ़ें। कई बार परीक्षा केंद्र शहर के बाहरी इलाके में होता है, इसलिए समय का सही अनुमान लगाना जरूरी होता है।

RRB Group D 2025 परीक्षा को लेकर उम्मीदवारों में काफी उत्साह है, क्योंकि यह भर्ती स्थायी सरकारी नौकरी का अवसर देती है। ऐसे में जरूरी है कि उम्मीदवार अफवाहों से दूर रहें और केवल आधिकारिक नोटिस पर ही भरोसा करें। रेलवे भर्ती बोर्ड की वेबसाइट और विश्वसनीय न्यूज प्लेटफॉर्म से मिलने वाली जानकारी ही सही मानी जानी चाहिए।

निष्कर्ष

RRB Group D Exam City Slip 2025 उम्मीदवारों को परीक्षा शहर और शिफ्ट की प्रारंभिक जानकारी देती है, जबकि Admit Card 2025 परीक्षा में प्रवेश के लिए अनिवार्य दस्तावेज होता है। दोनों ही दस्तावेज समय पर डाउनलोड करना और उनमें दी गई जानकारी को ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है। जैसे ही रेलवे भर्ती बोर्ड की ओर से कोई आधिकारिक अपडेट जारी किया जाएगा, उम्मीदवार तुरंत अपनी संबंधित RRB वेबसाइट पर जाकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

15 दिसंबर को बदलेगा मौसम! बिहार-UP-दिल्ली में कोहरा और ठंड मचाएगी कहर

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15 दिसंबर आते-आते उत्तर भारत में सर्दी पूरी तरह से अपना असर दिखाने लगती है। दिसंबर के मध्य तक हिमालयी क्षेत्रों से आने वाली ठंडी हवाएं मैदानी इलाकों में तापमान को तेजी से गिरा देती हैं। इस समय बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर जैसे राज्यों में सुबह और रात के समय ठंड ज्यादा महसूस होती है, जबकि दिन में हल्की धूप राहत देती है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस अवधि में उत्तर भारत का मौसम शुष्क बना रहता है, लेकिन कोहरे और धुंध की समस्या लगातार बनी रहती है।

15 दिसंबर को अधिकतर इलाकों में बारिश की संभावना नहीं रहती, जिससे ठंड का असर और बढ़ जाता है। नमी कम होने के कारण रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जाती है। ग्रामीण इलाकों में खुले खेतों और नदियों के आसपास घना कोहरा देखने को मिलता है, जिससे दृश्यता काफी कम हो जाती है। यही वजह है कि दिसंबर के मध्य में सड़क, रेल और हवाई यातायात पर मौसम का असर साफ नजर आता है।

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इस दौरान दिन और रात के तापमान में अंतर बढ़ जाता है। दिन में जहां हल्की धूप निकलने से मौसम सामान्य लगता है, वहीं सूर्य ढलते ही ठंडी हवाओं के साथ ठिठुरन बढ़ जाती है। मौसम का यह मिजाज खासकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

बिहार और पटना में 15 दिसंबर का मौसम

बिहार में 15 दिसंबर का मौसम ठंड और कोहरे के इर्द-गिर्द घूमता है। पटना, गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर जैसे शहरों में सुबह के समय घना कोहरा या धुंध देखने को मिल सकती है। खासकर गंगा नदी के किनारे बसे इलाकों में कोहरे की तीव्रता अधिक रहने की संभावना रहती है। सुबह के समय दृश्यता कम होने के कारण वाहन चालकों को सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

पटना में दिन का मौसम अपेक्षाकृत साफ रह सकता है और हल्की धूप निकल सकती है, जिससे लोगों को ठंड से थोड़ी राहत मिलती है। हालांकि, शाम ढलते ही तापमान तेजी से गिरने लगता है। ग्रामीण इलाकों में खुले स्थानों पर ठंड ज्यादा महसूस होती है। खेतों में काम करने वाले किसानों को सुबह-सुबह ठंड और कोहरे से जूझना पड़ता है।

15 दिसंबर के आसपास बिहार में ठंडी पछुआ हवाएं चलती हैं, जो तापमान को नीचे बनाए रखती हैं। बारिश की संभावना न के बराबर होती है, जिससे वातावरण शुष्क बना रहता है। यही कारण है कि सर्दी का असर लंबे समय तक महसूस होता है। इस मौसम में लोग गर्म कपड़ों का सहारा लेते हैं और सुबह-शाम अलाव जलाते नजर आते हैं।

उत्तर प्रदेश में 15 दिसंबर का मौसम: कोहरे का कहर

उत्तर प्रदेश में 15 दिसंबर का मौसम सर्दी और घने कोहरे के लिए जाना जाता है। पूर्वी यूपी से लेकर पश्चिमी यूपी तक सुबह के समय कोहरा आम बात हो जाती है। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ और आगरा जैसे शहरों में सुबह-सुबह दृश्यता काफी कम हो सकती है। कई इलाकों में कोहरा इतना घना होता है कि सड़कों पर चलना मुश्किल हो जाता है।

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दिन के समय हल्की धूप निकलने से तापमान थोड़ा बढ़ता है, लेकिन ठंडी हवाएं चलने से ठंड बनी रहती है। रात के समय तापमान और गिर जाता है, जिससे सर्दी का असर बढ़ जाता है। ग्रामीण इलाकों में खुले खेतों के कारण ठंड ज्यादा महसूस होती है और फसलों पर ओस जमने लगती है।

15 दिसंबर के आसपास उत्तर प्रदेश में शीतलहर जैसी स्थिति बन सकती है। खासकर पश्चिमी यूपी में रात का तापमान सामान्य से नीचे जा सकता है। मौसम का यह असर जनजीवन के साथ-साथ यातायात पर भी पड़ता है। ट्रेनें और बसें देरी से चलती हैं, वहीं हाईवे पर वाहन चालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।

दिल्ली-एनसीआर में 15 दिसंबर का मौसम और प्रदूषण का असर

दिल्ली-एनसीआर में 15 दिसंबर का मौसम ठंड, कोहरा और वायु प्रदूषण तीनों का मिश्रण होता है। सुबह के समय हल्का से मध्यम कोहरा या स्मॉग देखने को मिल सकता है। ठंडी हवाओं के साथ प्रदूषण के कण हवा में बने रहते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है। इस दौरान सुबह-सुबह टहलने वाले लोगों को सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है।

दिन में सूरज निकलने पर मौसम थोड़ा साफ होता है, लेकिन धूप कमजोर रहती है। तापमान सामान्य सर्दियों जैसा रहता है, जिससे लोगों को गर्म कपड़ों की जरूरत बनी रहती है। शाम होते-होते फिर से ठंड बढ़ने लगती है और कोहरा छाने लगता है।

दिल्ली में 15 दिसंबर के आसपास ठंड का असर बढ़ जाता है, खासकर रात के समय। खुले इलाकों और बाहरी क्षेत्रों में तापमान और कम महसूस होता है। प्रदूषण के कारण ठंड का असर और ज्यादा हो जाता है, जिससे आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

निष्कर्ष

15 दिसंबर का मौसम उत्तर भारत के लिए ठंड, कोहरा और शुष्क वातावरण लेकर आता है। बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में सुबह-शाम ठंड और कोहरे का असर साफ नजर आता है। दिन में हल्की धूप जरूर राहत देती है, लेकिन कुल मिलाकर सर्दी का प्रकोप बना रहता है। इस मौसम में लोगों को स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने, गर्म कपड़े पहनने और यात्रा के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

UP Panchayati Raj Recruitment 2025: 826 पदों पर भर्ती शुरू, ग्रेजुएट तुरंत करें आवेदन

यह तस्वीर उत्तर प्रदेश पंचायत राज विभाग के कार्यालय भवन की है। विभाग द्वारा राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के तहत ब्लॉक परियोजना प्रबंधक के 826 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

पंचायती राज विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा युवाओं के लिए एक बड़ी रोजगार से जुड़ी घोषणा की गई है। राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) योजना के अंतर्गत ब्लॉक परियोजना प्रबंधक (Block Project Manager – BPM) के कुल 826 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह भर्ती पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से की जाएगी और चयन प्रक्रिया विभाग द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार संपन्न होगी।यह अवसर खास तौर पर उन युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जो ग्रामीण विकास, पंचायत प्रशासन, आईटी और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और सरकारी विभाग में कार्य करने की इच्छा रखते हैं। पंचायती राज विभाग की यह भर्ती न केवल रोजगार का माध्यम बनेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक कार्यों को मजबूती देने में भी सहायक होगी।

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भर्ती का उद्देश्य और पदों का विस्तृत विवरण

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) योजना का मुख्य उद्देश्य पंचायतों को सशक्त बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और तकनीक के माध्यम से विकास कार्यों को गति देना है। इसी उद्देश्य के तहत ब्लॉक परियोजना प्रबंधक की नियुक्ति की जा रही है।

कुल पदों की संख्या

इस भर्ती अभियान के अंतर्गत कुल 826 पद निर्धारित किए गए हैं। इन पदों को विभिन्न आरक्षित और अनारक्षित श्रेणियों में विभाजित किया गया है ताकि सभी वर्गों को समान अवसर मिल सके।

श्रेणीवार पदों का वितरण

  • अनारक्षित (UR) – 413 पद
  • अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC – 27%) – 223 पद
  • अनुसूचित जाति (SC – 21%) – 173 पद
  • अनुसूचित जनजाति (ST – 2%) – 17 पद

यह स्पष्ट किया गया है कि यह भर्ती प्रक्रिया आउटसोर्सिंग एजेंसी UPDESCO के माध्यम से संचालित की जाएगी और चयनित अभ्यर्थियों को उत्तर प्रदेश के विभिन्न विकास खंडों में तैनात किया जाएगा।

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कार्य की प्रकृति

ब्लॉक परियोजना प्रबंधक का कार्य पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं की निगरानी, डेटा प्रबंधन, रिपोर्ट तैयार करना, डिजिटल कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करना और उच्च अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करना होगा। इस पद पर कार्य करने वाले अभ्यर्थी को पंचायत प्रशासन की जमीनी समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा।

योग्यता, आयु सीमा, वेतनमान और चयन प्रक्रिया

शैक्षणिक योग्यता

इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार का मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduate) होना अनिवार्य है। इसके साथ ही विभाग ने तकनीकी और कंप्यूटर ज्ञान को प्राथमिकता दी है।

अभ्यर्थियों के पास निम्न में से कोई एक योग्यता होना आवश्यक है—

  • NIELIT का CCC प्रमाणपत्र
  • DCA / PGDCA / ADCA
  • O’ Level या ‘A’ Level सर्टिफिकेट
  • तकनीकी डिग्री जैसे:
    • BCA
    • B.Sc. (IT / Computer Science)
    • B.Tech
    • MCA

इन योग्यताओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चयनित अभ्यर्थी डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन रिपोर्टिंग में दक्ष हों।

आयु सीमा

  • न्यूनतम आयु: 18 वर्ष
  • अधिकतम आयु: 35 वर्ष

आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को राज्य सरकार के नियमानुसार आयु में छूट प्रदान की जाएगी।

वेतनमान

  • चयनित अभ्यर्थियों को ₹15,001 प्रतिमाह का मानदेय दिया जाएगा।
  • यह राशि सभी करों सहित (All Inclusive) होगी।

हालांकि यह पद आउटसोर्सिंग के अंतर्गत है, फिर भी तय मानदेय और नियमित कार्य प्रणाली इसे युवाओं के लिए आकर्षक बनाती है।

चयन प्रक्रिया

  • आवेदन की जांच
  • शैक्षणिक योग्यता के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग
  • विभागीय मानकों के अनुसार अंतिम चयन

किसी भी प्रकार की लिखित परीक्षा की जानकारी फिलहाल अधिसूचना में नहीं दी गई है।

आवेदन प्रक्रिया, तिथियां और महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश

आवेदन की महत्वपूर्ण तिथियां

ऑनलाइन आवेदन शुरू: 01 दिसंबर 2025

आवेदन की अंतिम तिथि: 15 दिसंबर 2025

अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।

आवेदन कैसे करें

  • आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे
  • अभ्यर्थी को सेवायोजन पोर्टल पर जाकर आवेदन करना होगा
  • आवेदन करते समय सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करना अनिवार्य होगा

महत्वपूर्ण निर्देश

  • उम्मीदवार को उसी जिले का निवासी होना चाहिए, जहां से वह आवेदन कर रहा है
  • गलत या अधूरी जानकारी देने पर आवेदन निरस्त किया जा सकता है
  • विभाग किसी भी समय भर्ती प्रक्रिया में बदलाव या निरस्तीकरण का अधिकार सुरक्षित रखता है

क्यों खास है यह भर्ती

  • ग्रामीण विकास से जुड़ा प्रतिष्ठित सरकारी अवसर
  • पंचायत स्तर पर प्रशासनिक अनुभव
  • आईटी और तकनीकी पृष्ठभूमि वालों के लिए सुनहरा मौका
  • स्थिर मासिक मानदेय
  • भविष्य में अन्य सरकारी परियोजनाओं में अनुभव का लाभ

निष्कर्ष

पंचायती राज विभाग की यह भर्ती उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलने वाली है। 826 पदों पर होने वाली यह नियुक्ति न केवल बेरोजगारी को कम करने में सहायक होगी, बल्कि पंचायत व्यवस्था को मजबूत बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगी। योग्य और इच्छुक अभ्यर्थियों को चाहिए कि वे समय रहते आवेदन करें और इस अवसर का पूरा लाभ उठाएं।

BSEB 10th Final Admit Card 2026: बिहार बोर्ड मैट्रिक फाइनल एडमिट कार्ड जनवरी 2026 में जारी होगा, छात्रों की तैयारी तेज — जानें पूरी अपडेट

BSEB 10th Final Admit Card 2026

BSEB 10th Final Admit Card 2026:बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने मैट्रिक परीक्षा 2026 के लिए अपनी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचा दी हैं। बोर्ड सूत्रों और पिछले वर्षों के पैटर्न के अनुसार, बिहार बोर्ड 10वीं फाइनल एडमिट कार्ड 2026 को जनवरी 2026 के पहले या दूसरे सप्ताह में जारी किए जाने की संभावना है। बिहार बोर्ड हर साल फरवरी में आयोजित होने वाली मैट्रिक परीक्षा से लगभग 10–15 दिन पहले फाइनल एडमिट कार्ड उपलब्ध कराता है। इसी क्रम में इस बार भी एडमिट कार्ड समय से जारी किया जाएगा, जिससे छात्रों को परीक्षा केंद्र और अन्य जानकारी समय रहते मिल सके।

नवंबर 2025 में बोर्ड द्वारा जारी Dummy Admit Card के बाद सुधार प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। अब बोर्ड विद्यार्थियों को सही विवरण के साथ फाइनल एडमिट कार्ड उपलब्ध कराएगा, जिसे केवल स्कूल प्रिंसिपल ही आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं। छात्रों द्वारा सीधे डाउनलोड करने की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं रहती है, इसलिए उन्हें अपने-अपने विद्यालय से संपर्क करना आवश्यक होगा।

परीक्षा तिथि, केंद्र, रोल नंबर, विषय कोड, फोटो, हस्ताक्षर और व्यक्तिगत जानकारी इसी फाइनल एडमिट कार्ड पर होती है। परीक्षा के दिन इसे साथ ले जाना अनिवार्य होगा। बिहार बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष भी पेपर लीक रोकने और परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए सख्त नियम लागू रहेंगे।

जनवरी 2026 में जारी होगा BSEB 10th Final Admit Card — कब और कैसे मिलेगा?

बिहार बोर्ड हर साल 10वीं कक्षा का फाइनल एडमिट कार्ड जनवरी के पहले पखवाड़े में जारी करता है। इस परंपरा को देखते हुए इस बार भी फाइनल एडमिट कार्ड जनवरी 2026 के पहले सप्ताह से उपलब्ध हो सकता है। BSEB 10th Final Admit Card 2026 बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर एडमिट कार्ड डाउनलोड लिंक स्कूलों के लिए ही सक्रिय किया जाता है।

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स्कूल कैसे डाउनलोड करेंगे एडमिट कार्ड?

स्कूल प्रिंसिपल अपने लॉगिन क्रेडेंशियल का उपयोग करके नीचे दी गई आधिकारिक वेबसाइटों पर लॉगिन करते हैं:

  • secondary.biharboardonline.com
  • biharboardonline.bihar.gov.in

लॉगिन करने के बाद, स्कूल छात्र सूची से संबंधित बच्चे का एडमिट कार्ड डाउनलोड कर उसे प्रिंट कर देता है। प्रिंटेड कॉपी पर प्रिंसिपल की मुहर और हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं, तभी वह बोर्ड मान्य होता है। इसके बाद यह एडमिट कार्ड छात्रों को वितरण के लिए दिया जाता है।

छात्र सीधे एडमिट कार्ड क्यों नहीं डाउनलोड कर सकते?

बिहार बोर्ड सुरक्षा कारणों से मैट्रिक और इंटर का फाइनल एडमिट कार्ड सीधे छात्रों को डाउनलोड करने की अनुमति नहीं देता। इससे यह सुनिश्चित होता है कि
1. गलत जानकारी में बदलाव न किया जा सके
2. परीक्षा केंद्र की जानकारी सीमित समय तक ही सार्वजनिक रहे
3. सुरक्षा कारणों से परीक्षा केंद्रों पर भीड़ न हो

इसलिए छात्र केवल स्कूल द्वारा उपलब्ध कराई गई प्रिंटेड कॉपी ही प्राप्त कर सकते हैं।

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एडमिट कार्ड जारी होने के बाद क्या करें?

छात्रों को अपने एडमिट कार्ड में निम्नलिखित जानकारियों को ध्यानपूर्वक जांचना चाहिए:

  • पूरा नाम और स्पेलिंग
  • माता-पिता का नाम
  • फोटो और हस्ताक्षर
  • परीक्षा केंद्र का नाम और पता
  • रोल नंबर, रोल कोड
  • विषयों की सूची और कोड
  • परीक्षा तिथि और शिफ्ट

अगर किसी प्रकार की त्रुटि मिलती है, तो तुरंत स्कूल प्रशासन से संपर्क करें। सामान्यतः फाइनल एडमिट कार्ड में सुधार संभव नहीं होता, इसलिए पहले डमी एडमिट कार्ड सुधार प्रक्रिया को ही बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2026 कब होगी? — शेड्यूल और पैटर्न की पूरी जानकारी

पिछले वर्षों के शेड्यूल को देखते हुए बिहार बोर्ड 10वीं परीक्षा फरवरी के तीसरे सप्ताह में आयोजित करता है। इसी अनुसार इस बार भी 17 फरवरी 2026 से 25 फरवरी 2026 के बीच परीक्षा आयोजित किए जाने की संभावना जताई जा रही है। बोर्ड ने पहले ही परीक्षा कैलेंडर जारी कर दिया है, जिसमें फरवरी में मैट्रिक परीक्षा का उल्लेख है।

परीक्षा दो शिफ्टों में होगी

बिहार बोर्ड हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी परीक्षा दो शिफ्टों में आयोजित करेगा—

  1. पहली शिफ्ट: सुबह 9:30 बजे से 12:45 बजे तक
  2. दूसरी शिफ्ट: दोपहर 1:45 बजे से 5:00 बजे तक

प्रत्येक परीक्षा के लिए 15 मिनट का अतिरिक्त समय प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए दिया जाता है।

OMR और Answer Sheet दोनों पर आधारित परीक्षा

मैट्रिक की कई परीक्षाओं में एक हिस्सा ऑब्जेक्टिव (MCQ) और एक हिस्सा Subjective रहता है।
OMR शीट पर सावधानी से भरना बेहद जरूरी है, अन्यथा उत्तर गलत माने जा सकते हैं।

केंद्र पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

बोर्ड ने इस बार भी
CCTV निगरानी
बायोमेट्रिक उपस्थिति
Flying Squad
मोबाइल और गैजेट पर प्रतिबंध
जैसी व्यवस्थाएँ पहले से ही तय कर ली हैं, ताकि परीक्षा नकल रहित और सुरक्षित तरीके से पूरी कराई जा सके।

फाइनल एडमिट कार्ड के महत्व और छात्रों के लिए जरूरी निर्देश

फाइनल एडमिट कार्ड किसी भी छात्र के लिए परीक्षा का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। इसके बिना छात्र को परीक्षा हॉल में प्रवेश नहीं दिया जाता। इसलिए इसे प्राप्त करने के बाद छात्र इसे प्लास्टिक कवर में सुरक्षित रखें और परीक्षा के दिन समय से पहले केंद्र पर पहुँचें।

बोर्ड की ओर से जारी प्रमुख निर्देश

समय पर परीक्षा केंद्र पहुँचे – कम से कम 30 मिनट पहले
1. एडमिट कार्ड और स्कूल आईडी दोनों साथ रखें
2. केंद्र पर मोबाइल फोन, ईयरफोन, स्मार्टवॉच आदि ले जाना प्रतिबंधित
3. किसी भी प्रकार के नोट्स या कागज़ पर हमेशा निगरानी
4. परीक्षा समाप्त होने तक अनुशासन बनाए रखें

छात्रों की आम गलतियाँ जिनसे बचना चाहिए

बहुत देर से केंद्र पर पहुँचना – गेट समय पर ही बंद हो जाता है

गलत पेन का उपयोग – OMR के लिए केवल ब्लैक/ब्लू बॉल पेन

OMR शीट पर काट-छांट – इससे उत्तर अमान्य हो सकता है

एडमिट कार्ड खो देना – परीक्षा से पहले उसकी 2–3 कॉपी बनाकर रखें

निष्कर्ष

बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2026 के लिए फाइनल एडमिट कार्ड जनवरी 2026 में जारी किए जाने की पूरी संभावना है। छात्रों को चाहिए कि वे नियमित रूप से अपने विद्यालय से संपर्क में रहें, बोर्ड की अपडेट पर नजर रखें और परीक्षा की तैयारी अंतिम चरण में पूरी मजबूती से जारी रखें। फाइनल एडमिट कार्ड मिलने के बाद उसमें दी गई सभी जानकारियों को ध्यानपूर्वक जांचना बेहद आवश्यक है।