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tulsi vivah keb hai 2025 हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और शुभ पर्वों में से एक है। यह दिन भगवान विष्णु और तुलसी माता के विवाह के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व का धार्मिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टि से बड़ा महत्व है। भारत में यह पर्व हर साल कार्तिक माह की शुक्ल एकादशी तिथि को मनाया जाता है, जिसे देव उठनी एकादशी भी कहा जाता है। आइए जानते हैं इस बार पूजा विधि, कथा और महत्व के बारे में विस्तार से।
2025 में तुलसी विवाह कब है? | dev uthani ekadashi kab hai 2025 Date and Time
हिंदू पंचांग के अनुसार tulsi vivah keb hai 2025 की तिथि 2 नवंबर 2025, रविवार के दिन है।
कार्तिक शुक्ल एकादशी की यह तिथि 1 नवंबर 2025 की रात 10:18 बजे से शुरू होकर 2 नवंबर की रात 8:52 बजे तक रहेगी।
इस दिन भगवान विष्णु अपने चार महीने के शयन से जागते हैं और उसी के साथ तुलसी माता का विवाह शालिग्राम (विष्णु) से होता है। इस प्रकार शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
तुलसी विवाह का महत्व | Importance of Tulsi Vivah Keb Hai 2025
हिंदू परंपरा में tulsi vivah का अत्यधिक धार्मिक महत्व है। माना जाता है कि इस दिन विवाह करने या किसी नए कार्य की शुरुआत करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। तुलसी माता को देवी लक्ष्मी का अवतार कहा गया है और भगवान विष्णु उनके पति माने जाते हैं।
tulsi vivah keb hai 2025 के दिन महिलाएं व्रत रखकर अपने परिवार की सुख-शांति और वैवाहिक जीवन की समृद्धि की कामना करती हैं।
पूजा विधि | Tulsi Vivah Keb Hai 2025 Puja Vidhi
tulsi vivah keb hai 2025 के दिन सुबह स्नान कर घर की साफ-सफाई की जाती है और तुलसी चौरा को सजाया जाता है। तुलसी के पौधे को नई चुनरी, बिंदी, कंगन और सुहाग के आभूषणों से सजाया जाता है। फिर शालिग्राम भगवान या भगवान विष्णु की मूर्ति के साथ तुलसी माता का विवाह कराया जाता है।
इस दौरान महिलाएं मंगल गीत गाती हैं और पारंपरिक विधि से पूजा करती हैं।तुलसी विवाह के अवसर पर फल, मिठाई, और प्रसाद वितरित किया जाता है।
तुलसी विवाह की कथा | Tulsi Vivah Keb Hai 2025 Katha
tulsi vivah keb hai 2025 का संबंध वृंदा और जालंधर की कथा से जुड़ा है। पुराणों के अनुसार वृंदा नामक एक पतिव्रता स्त्री थी, जो असुरराज जालंधर की पत्नी थी। वृंदा की भक्ति और सत्यता से भगवान विष्णु इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने उसे वरदान दिया कि वह धरती पर तुलसी के रूप में पूजी जाएगी।
भगवान विष्णु ने स्वयं तुलसी से विवाह करने का वचन दिया, और तभी से tulsi vivah का पर्व मनाया जाता है। यह कथा भगवान विष्णु और तुलसी माता के दिव्य मिलन का प्रतीक है।
तुलसी विवाह के दिन क्या करें और क्या न करें | What to Do and Avoid on Tulsi Vivah Keb Hai 2025
tulsi vivah keb hai 2025 के दिन व्रत रखकर तुलसी माता और भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए।
इस दिन तुलसी माता को दूध, गंगाजल, लाल चुनरी और सिंदूर अर्पित किया जाता है। महिलाएं पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं और शुभ मंगल गीत गाती हैं।
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इस दिन मांस, मदिरा या किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन का सेवन नहीं किया जाता।
कहा जाता है कि tulsi vivah keb hai 2025 के दिन जो व्यक्ति सच्चे मन से पूजा करता है, उसे विवाह-सुख, संतान-सुख और धन-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
तुलसी विवाह और देव उठनी एकादशी का संबंध | Connection of with Dev Uthani Ekadashi
tulsi vivah keb hai 2025 का संबंध सीधे देव उठनी एकादशी से है।
चार महीने के चातुर्मास में जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं, तब कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता।
लेकिन tulsi vivah keb hai 2025 के दिन भगवान विष्णु अपने शयन से जागते हैं, और इसी दिन से विवाह जैसे शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। इसलिए इस दिन को देव जागरण का दिन भी कहा जाता है।
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तुलसी विवाह का सामाजिक और पारिवारिक महत्व | Social Significance
tulsi vivah keb hai 2025 केवल धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि पारिवारिक एकता और प्रेम का प्रतीक भी है।
ग्रामीण भारत में इस दिन लोग सामूहिक रूप से तुलसी विवाह का आयोजन करते हैं। महिलाएं और बच्चे इस उत्सव में भाग लेते हैं और इसे परिवार-समान माहौल में मनाते हैं।यह संदेश मिलता है कि श्रद्धा, विश्वास और भक्ति जीवन में खुशियों की कुंजी हैं।
निष्कर्ष
अंत में कहा जा सकता है कि tulsi vivah का पर्व हिंदू समाज के लिए अत्यंत पवित्र और प्रेरणादायक है। यह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि पारिवारिक एकता और प्रेम का संदेश भी देता है।
इस दिन भगवान विष्णु और तुलसी माता का विवाह करके व्यक्ति अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।
अगर आप भी जानना चाहते हैं कि tulsi vivah keb hai 2025, तो याद रखिए — यह पर्व 2 नवंबर 2025, रविवार को मनाया जाएगा।



