बिहार की 40 महिलाओं के दूध में मिला यूरेनियम: ICMR–महावीर कैंसर संस्थान की चौंकाने वाली रिपोर्ट

Bihar uranium in milk

बिहार से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक खुलासा सामने आया है। महावीर कैंसर संस्थान, पटना की रिसर्च यूनिट द्वारा ICMR (Indian Council of Medical Research) के सहयोग से की गई एक स्टडी में यह पाया गया है कि राज्य के छह जिलों की 40 माताओं के दूध के सैंपल में यूरेनियम की मौजूदगी मिली है।
यह अध्ययन न केवल प्रदेश के पर्यावरणीय हालात पर सवाल खड़ा करता है बल्कि मातृ-शिशु स्वास्थ्य के लिए संभावित खतरे की ओर भी इशारा करता है।

रिसर्च कहाँ और कैसे हुई? – पूरा वैज्ञानिक विवरण

महावीर कैंसर संस्थान के रिसर्च सेंटर ने ICMR के साथ मिलकर यह सर्वेक्षण पिछले कुछ महीनों में किया था।
इस दौरान:

  • बिहार के 6 प्रमुख जिलों से
  • 40 महिलाओं (स्तनपान कराने वाली माताओं) का
  • दूध का सैंपल इकट्ठा किया गया।

रिसर्च में क्या पाया गया?

विशेष लैब विश्लेषण के बाद वैज्ञानिकों ने रिपोर्ट में बताया कि कई सैंपलों में यूरेनियम की मात्रा सामान्य सीमा से अधिक पाई गई।
यानी यह संकेत देता है कि महिलाएँ संभवतः ऐसे पानी या भोजन के संपर्क में थीं जिसमें रेडियोधर्मी तत्वों की थोड़ी मात्रा मौजूद थी।

यूरेनियम दूध में कैसे पहुँच सकता है? क्या कहती हैं मेडिकल स्टडीज

दुनिया भर में की गई कई रिसर्च बताती हैं कि स्तनपान कराने वाली माताओं के शरीर में जो भी भारी धातुएँ (Heavy Metals) जमा होती हैं, वे दूध के माध्यम से शिशु तक पहुँच सकती हैं।

संभावित कारण

विशेषज्ञों के अनुसार यूरेनियम शरीर में पहुँचने की मुख्य वजहें हो सकती हैं –

  • भूजल में यूरेनियम की मात्रा बढ़ना
  • बोरिंग/हैंडपंप का अत्यधिक उपयोग
  • औद्योगिक कचरे या खनन से फैलने वाला प्रदूषण
  • कृषि में रसायनों का उपयोग
  • भोजन, अनाज या मिट्टी के माध्यम से heavy metal का शरीर में जाना

बिहार के कई जिलों में भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसी समस्याएँ पहले भी मिल चुकी हैं, लेकिन अब यूरेनियम की उपस्थिति एक नया खतरा माना जा रहा है।

क्या इससे बच्चों को खतरा है? विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

ICMR और महावीर कैंसर संस्थान के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यह समस्या व्यापक स्तर पर पाई गई, तो यह शिशुओं के विकास, हड्डियों, किडनी और neurological स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।

शिशु पर संभावित प्रभाव

  • शारीरिक विकास में बाधा
  • किडनी पर प्रभाव
  • इम्यून सिस्टम कमजोर होना
  • मानसिक/न्यूरोलॉजिकल विकास पर असर

माँ के लिए क्या खतरा?

  • किडनी और लिवर पर भार
  • शरीर में सूक्ष्म रेडियोधर्मी जमाव
  • दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा

विशेषज्ञों ने साफ कहा कि अभी घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन यह समस्या तुरंत सरकारी हस्तक्षेप की मांग करती है।

किन जिलों में मिले सैंपल? सरकार क्या कदम उठा रही है?

रिसर्च टीम ने जिन छह जिलों से सैंपल लिए, उनके नाम अंतिम रिपोर्ट में शामिल किए जाएंगे।
फिलहाल जानकारी मिल रही है कि यह जिले वे हैं जहाँ पहले भी पानी में आर्सेनिक या अन्य धातुएँ पाई गई थीं।

राज्य सरकार की संभावित कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग और जल संसाधन विभाग को इस रिपोर्ट की सूचना दे दी गई है। इसके बाद:

  • उन इलाकों में भूजल की विस्तृत जांच
  • सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था
  • माताओं की स्वास्थ्य जाँच
  • बच्चों की medical screening
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य अलर्ट

जारी किया जा सकता है।

यह रिपोर्ट बिहार के लिए चेतावनी — आगे क्या करना आवश्यक है?

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में तेजी से बदलते पर्यावरण, जलस्तर और मानव गतिविधियों के कारण भूजल में भारी धातुओं की मात्रा लगातार बढ़ रही है।
अगर समय रहते नियंत्रण नहीं हुआ तो यह आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

क्या करना चाहिए?

  • पानी की नियमित जाँच
  • RO या certified filters का उपयोग
  • सरकारी जल परीक्षण रिपोर्ट को सार्वजनिक करना
  • माताओं और बच्चों की नियमित स्वास्थ्य स्क्रीनिंग
  • पर्यावरणीय खतरों को कम करने के लिए नीतियाँ बनाना