भोजपुर में बड़ा हादसा टला: 25 जुलाई 2025 को बिहार के भोजपुर ज़िले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई। पूर्णिया के निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू यादव बाढ़ प्रभावित इलाके का निरीक्षण करने पहुँचे थे। इसी दौरान, जहां वे खड़े थे, वहीं का ज़मीन धंस गई और एक मकान गंगा नदी में समा गया। गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह घटना एक बड़े हादसे का संकेत थी।
गंगा नदी का प्रकोप और भोजपुर की स्थिति
बिहार में हर साल बाढ़ एक विकराल समस्या बनती जा रही है। इस बार गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है और भोजपुर ज़िला इसका मुख्य शिकार बना है। जवेनिया गांव में नदी की कटाव रफ्तार इतनी तेज़ है कि पूरे गाँव का अस्तित्व ही संकट में पड़ गया है। अब तक दर्जनों मकान नदी में समा चुके हैं और सैकड़ों लोग बेघर हो गए हैं।
पप्पू यादव मौके पर क्यों पहुँचे थे?
पप्पू यादव अपने सामाजिक कार्यों और जनता से सीधे जुड़ाव के लिए जाने जाते हैं। उन्हें जानकारी मिली थी कि भोजपुर के जवेनिया गांव में बाढ़ और कटाव से लोग परेशान हैं। उन्होंने बिना किसी सरकारी अमले के वहां पहुंचने का फैसला किया ताकि लोगों की समस्याएं खुद सुन सकें और उनकी मदद कर सकें।घटना के दौरान पप्पू यादव एक मकान के सामने खड़े थे, जो नदी किनारे था। मीडिया और ग्रामीणों की मौजूदगी में अचानक ज़मीन में कंपन हुआ और वह मकान गंगा में समा गया। उसी मकान के पास सांसद पप्पू यादव भी खड़े थे, लेकिन ग्रामीणों ने समय रहते उन्हें पीछे खींच लिया और वे बाल-बाल बच गए।उन्होंने खुद कहा कि “यह भगवान का चमत्कार है और ग्रामीणों की सतर्कता की वजह से मैं आज ज़िंदा हूं।”
वीडियो वायरल: लोगों में रोष और चिंता
इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पप्पू यादव खुद ने X (पूर्व ट्विटर) पर इसका वीडियो साझा किया और सरकार पर सवाल उठाए, पटना से महज़ 100 किलोमीटर दूर ये गांव पूरी तरह डूब गया है और सरकार को खबर तक नहीं। ये विकास नहीं विनाश है।” यह वीडियो वायरल होते ही लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी और प्रशासन की नाकामी पर बहस शुरू हो गई।
सरकार पर सीधा हमला
पप्पू यादव ने घटना के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि:
- बिहार सरकार ने बाढ़ राहत के नाम पर केवल दिखावा किया है।
- CAG की रिपोर्ट में 70 हज़ार करोड़ के घोटाले उजागर हुए, लेकिन पीड़ितों को मदद नहीं मिली।
- बालू माफियाओं को संरक्षण देने से गंगा किनारे के गांव तबाह हो रहे हैं।
- बाढ़ पीड़ितों का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है, जो लोकतंत्र के खिलाफ है।
जवेनिया गांव के कई लोगों ने बताया कि प्रशासन ने अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया है। बाढ़ हर साल आती है, लेकिन हर बार सरकार केवल नाव भेजकर खानापूर्ति करती है। इस बार तो लोगों के घर और ज़मीन ही बह गए, लेकिन कोई मंत्री या अधिकारी मौके पर नहीं पहुँचा।
एक बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा:
“पप्पू यादव पहले नेता हैं जो खुद हमारे गांव आए, वरना बाकी लोग तो हेलिकॉप्टर से ऊपर से हाल देखकर चले जाते हैं।”पप्पू यादव की मौजूदगी में हुई इस घटना ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। घटना के बाद भी कोई अधिकारी मौके पर नहीं आया। ना कोई राहत कैंप लगाया गया और ना ही कटाव रोकने के लिए कोई तात्कालिक कार्रवाई हुई। यह स्थिति दिखाती है कि आपदा प्रबंधन व्यवस्था कितनी कमजोर है और आम जनता को कितनी उपेक्षा झेलनी पड़ रही है।
CAG रिपोर्ट और भ्रष्टाचार का मुद्दा
पप्पू यादव ने जिस CAG रिपोर्ट का हवाला दिया, उसमें बिहार में राहत और पुनर्वास योजनाओं में भारी भ्रष्टाचार का उल्लेख है। रिपोर्ट में कहा गया कि:
- राहत राशि में अनियमितताएं पाई गईं।
- आपदा प्रभावितों तक पूरी सहायता नहीं पहुंची।
- भ्रष्टाचार के चलते कागजों में ही योजनाएं पूरी हो गईं।
इस रिपोर्ट को लेकर विपक्षी दलों ने पहले ही सरकार पर सवाल उठाए थे, अब पप्पू यादव ने उसी मुद्दे को फिर उछाल दिया है।पप्पू यादव की यह घटना न सिर्फ एक व्यक्ति के बाल-बाल बचने की कहानी है, बल्कि पूरे तंत्र की असफलता की तस्वीर भी है। यदि समय रहते सरकार चेत जाए और आपदा प्रबंधन को सशक्त बनाए, तो शायद आगे चलकर ऐसे हादसों को टाला जा सकता है।
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