बोधगया (गया)। बिहार सरकार द्वारा राज्य-व्यापी भूमि सर्वे और भूमि रिकॉर्ड सुधार अभियान के तहत बोधगया प्रखंड में विशेष भूमि सर्वे कैंप का आयोजन किया गया। इस कैंप में बड़ी संख्या में किसान, जमीन मालिक और स्थानीय ग्रामीण शामिल हुए। शिविर का मुख्य उद्देश्य जमीन से जुड़े पुराने रिकॉर्ड को दुरुस्त करना, नामांतरण, जमाबंदी, बंटवारा और त्रुटि सुधार जैसी समस्याओं का समाधान करना रहा।
भूमि सर्वे कैंप को लेकर सुबह से ही लोगों में खासा उत्साह देखा गया। कई लोग अपने साथ जमीन से जुड़े दस्तावेज़ लेकर पहुंचे और अधिकारियों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याएं रखीं। प्रशासन की ओर से कहा गया कि इस तरह के कैंप का मकसद आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत देना और पारदर्शी तरीके से भूमि रिकॉर्ड को अपडेट करना है।
भूमि सर्वे कैंप का उद्देश्य और सरकार की मंशा
बिहार में लंबे समय से भूमि विवाद एक बड़ी समस्या रहे हैं। कई मामलों में जमीन से जुड़े दस्तावेज़ पुराने हैं या उनमें त्रुटियां पाई जाती हैं। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने विशेष भूमि सर्वे अभियान शुरू किया है। बोधगया में आयोजित यह कैंप उसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस कैंप का मुख्य उद्देश्य जमीन के सही रिकॉर्ड तैयार करना है ताकि भविष्य में किसी भी तरह के विवाद से बचा जा सके। अधिकारियों ने बताया कि सर्वे के माध्यम से जमीन की वास्तविक स्थिति, सीमांकन और मालिकाना हक की पुष्टि की जा रही है। इससे न सिर्फ किसानों को फायदा मिलेगा बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ भी सही व्यक्ति तक पहुंच सकेगा।
सरकार का मानना है कि जब जमीन के रिकॉर्ड सही होंगे, तब निवेश, विकास कार्य और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं में भी तेजी आएगी। बोधगया जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल पर भूमि रिकॉर्ड का स्पष्ट होना विकास की दृष्टि से भी बेहद जरूरी माना जा रहा है।
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कैंप में क्या-क्या सेवाएं दी गईं, किन समस्याओं का हुआ समाधान
बोधगया भूमि सर्वे कैंप में लोगों को कई तरह की सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इसमें प्रमुख रूप से:
- जमीन की जमाबंदी जांच और सुधार
- नामांतरण (म्यूटेशन) से जुड़ी समस्याओं का समाधान
- उत्तराधिकार के आधार पर जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव
- बंटवारा और सीमांकन से जुड़े मामलों की जानकारी
- पुराने खेसरा और खाता नंबर में सुधार
कई ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से उनके जमीन के कागजात में गलतियां थीं, जिन्हें सुधारने के लिए वे लगातार दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। कैंप में उन्हें एक ही स्थान पर अधिकारियों से मिलने और अपनी बात रखने का मौका मिला।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि जिन मामलों का तुरंत समाधान संभव नहीं था, उन्हें सूचीबद्ध कर आगे की कार्रवाई के लिए दर्ज किया गया। इससे लोगों को भरोसा मिला कि उनकी शिकायतों पर काम किया जाएगा और उन्हें अनदेखा नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों और किसानों की भागीदारी, मिला सीधा संवाद का अवसर
भूमि सर्वे कैंप में सबसे अहम बात यह रही कि ग्रामीणों और किसानों को अधिकारियों से सीधा संवाद करने का अवसर मिला। आमतौर पर जमीन से जुड़े मामलों में लोगों को दलालों या बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन इस कैंप में प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है।
कई किसानों ने बताया कि पहली बार उन्हें जमीन सर्वे और रिकॉर्ड सुधार की प्रक्रिया को विस्तार से समझने का मौका मिला। अधिकारियों ने सरल भाषा में बताया कि किन दस्तावेज़ों की जरूरत होती है और आवेदन कैसे किया जा सकता है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पंचायत स्तर के लोगों ने भी कैंप में भाग लिया और प्रशासन से आग्रह किया कि ऐसे शिविर नियमित रूप से लगाए जाएं। उनका कहना था कि इससे ग्रामीण इलाकों में जागरूकता बढ़ेगी और भूमि विवादों में कमी आएगी।
भविष्य की योजना और भूमि सर्वे से होने वाले फायदे
प्रशासन ने संकेत दिया है कि बोधगया के बाद गया जिले के अन्य प्रखंडों में भी इसी तरह के भूमि सर्वे कैंप लगाए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि तय समय सीमा के भीतर अधिकतम जमीन रिकॉर्ड को डिजिटल और त्रुटिरहित बनाया जाए।
भूमि सर्वे से होने वाले प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं:
- जमीन से जुड़े विवादों में कमी
- सरकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थी तक पहुंचना
- जमीन खरीद-फरोख्त में पारदर्शिता
- किसानों और जमीन मालिकों को कानूनी सुरक्षा
- विकास कार्यों में तेजी
अधिकारियों का कहना है कि भूमि रिकॉर्ड सुधार से न सिर्फ आम जनता को फायदा होगा बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था भी मजबूत होगी। बोधगया जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल के लिए यह कदम और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।















