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पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनाव आयोग के निर्देश पर परिवहन विभाग ने उन वाहनों का किराया तय कर दिया है, जिनका इस्तेमाल चुनावी कार्यों में किया जाएगा। इसमें बस, मिनी बस, जीप, वैन, बोलेरो, स्कॉर्पियो से लेकर स्कूल बस तक शामिल हैं।
परिवहन विभाग के अपर मुख्य सचिव मिहिर कुमार सिंह के आदेश के बाद यह किराया सूची जारी की गई है। इसके तहत वाहन मालिकों को उनकी गाड़ियों का दैनिक भाड़ा मिलेगा और ईंधन का खर्च अलग से दिया जाएगा।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में वाहनों के लिए तय भाड़ा – पूरी लिस्ट देखें
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परिवहन विभाग ने वाहनों का किराया सीट और क्षमता के आधार पर तय किया है।
- 50 से अधिक यात्री क्षमता वाली बसें – 3500 रुपये प्रतिदिन
- 40 से 49 सीट वाली बसें – 3200 रुपये प्रतिदिन
- मिनी बस (23 से 39 सीट) – 2500 रुपये प्रतिदिन
- मैक्स, टेम्पो (14 से 22 सीट) – 2000 रुपये प्रतिदिन
- जीप, वैन (9 सीट तक) – 1000 रुपये प्रतिदिन
- मारुति वैन (गैर एसी) – 1100 रुपये प्रतिदिन
- बोलरो, सूमो (गैर एसी) – 1200 रुपये प्रतिदिन
- बोलरो, सूमो (एसी) – 1500 रुपये प्रतिदिन
- एसी स्कॉर्पियो, क्वालिस, टवेरा – 1900 रुपये प्रतिदिन
- इनोवा, सफारी (एसी) – 2100 रुपये प्रतिदिन
- विक्रम, मैजिक, मिनीडोर – 700 रुपये प्रतिदिन
चुनावी कार्यों के लिए क्यों जरूरी हैं वाहन?
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चुनाव जैसे बड़े लोकतांत्रिक कार्यक्रम में लाखों कर्मियों, सुरक्षा बलों और अधिकारियों की तैनाती की जाती है। बूथ तक चुनाव सामग्री पहुँचाने से लेकर मतदाताओं की सुरक्षा और कर्मचारियों के आवागमन तक, हर जगह गाड़ियों की जरूरत पड़ती है।बिहार में इस बार अनुमान है कि डेढ़ लाख से अधिक वाहनों की आवश्यकता होगी। इसमें स्थानीय बसें, मिनी बसें, ट्रैक्टर, बोलेरो, टवेरा, स्कॉर्पियो, इनोवा जैसी गाड़ियां और स्कूल बसें शामिल होंगी।
स्कूल बसों का अधिग्रहण – अधिकतम तीन दिन
परिवहन विभाग ने साफ किया है कि स्कूल बसों का अधिग्रहण चुनावी कार्यों के लिए अधिकतम 3 दिनों तक ही होगा। इससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा।अगर किसी जिले में पर्याप्त वाहन नहीं मिलेंगे तो दूसरे जिलों से वाहन मंगाए जाएंगे।एवं वाहन चालकों के लिए प्रावधान
- प्रत्येक वाहन चालक और सह-चालक को प्रतिदिन 300 रुपये भत्ता मिलेगा।
- चुनावी कार्य में लगे वाहन मालिकों और चालकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए वित्त विभाग से सहमति ले ली गई है।
- जिन वाहनों का उपयोग चुनावी कामों में होगा, उनके रखरखाव की जिम्मेदारी भी विभाग की ओर से तय निर्देशों के अनुसार होगी।
विभाग की भूमिका, क्यों खास है यह आदेश?
परिवहन विभाग ने यह आदेश सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, जिला निर्वाचन पदाधिकारियों, वरीय पुलिस अधिकारियों, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण और जिला परिवहन पदाधिकारियों को भेज दिया है। ताकि चुनाव के दौरान वाहन अधिग्रहण और भुगतान प्रक्रिया में किसी तरह की देरी न हो।
1.वाहन मालिकों को पारदर्शिता – अब उन्हें पहले से पता होगा कि किस श्रेणी की गाड़ी का कितना किराया मिलेगा।
2.समय पर भुगतान – वित्त विभाग की मंजूरी से भुगतान की प्रक्रिया तेज होगी।
3.चालकों को लाभ – दैनिक भत्ता तय होने से उन्हें अतिरिक्त आर्थिक सहयोग मिलेगा।
4.चुनाव की सुचारू तैयारी – वाहनों की कमी न हो और पूरे प्रदेश में मतदान प्रक्रिया सही ढंग से पूरी हो सके।
Conclusion
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में परिवहन विभाग की यह पहल बेहद अहम है। लाखों वाहनों की व्यवस्था के बिना चुनाव कराना लगभग असंभव होता। तय भाड़ा और स्पष्ट दिशा-निर्देश न सिर्फ वाहन मालिकों के लिए राहत की खबर है बल्कि चुनाव आयोग और प्रशासन के लिए भी यह व्यवस्था प्रक्रिया को आसान बनाएगी।




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