बिहार में तकनीक की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने “Bihar E-Voting App“ लॉन्च किया है। इस ऐप के माध्यम से अब लोग मोबाइल फोन से अपने घर बैठे ही वोट डाल सकेंगे। यह पहल उन लोगों के लिए खास राहत लेकर आई है जो बाहर रहते हैं, लेकिन बिहार में वोट देना चाहते हैं।चलिए जानते हैं इस ऐप की खासियतें, रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया, वोटिंग का तरीका, और इससे जुड़ी सभी ज़रूरी जानकारियाँ।
Bihar E-Voting क्या है?
Bihar E-Voting एक मोबाइल आधारित वोटिंग प्लेटफॉर्म है जिसे बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य राज्य के हर नागरिक को आसान और डिजिटल माध्यम से वोटिंग का अधिकार देना है, खासकर उन प्रवासी मजदूरों और छात्रों के लिए जो वोटिंग के समय अपने क्षेत्र में उपस्थित नहीं रह पाते।यह ऐप जून 2025 में लॉन्च किया गया, ताकि 2025 के अंत में होने वाले पंचायत और नगरपालिका चुनावों में इसका पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उपयोग किया जा सके। आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में इसका पूर्ण उपयोग संभव किया जाएगा।
कर्मचारी चयन आयोग (SSC) जल्द ही SSC MTS (मल्टी टास्किंग स्टाफ) और हवलदार (CBIC और CBN) भर्ती 2025 की अधिसूचना आधिकारिक वेबसाइट ssc.gov.in पर जारी करने जा रहा है। जो भी उम्मीदवार सरकारी नौकरी की तलाश में हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन अवसर है।
अहम तिथियां (Important Dates):
विवरण
तारीख
अधिसूचना जारी
जून 2025 (अंतिम सप्ताह)
आवेदन की शुरुआत
अधिसूचना के साथ
आवेदन की अंतिम तिथि
24 जुलाई 2025
परीक्षा तिथि
20 सितंबर से 24 अक्टूबर 2025
कौन कर सकता है आवेदन? (Eligibility Criteria)
शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualification):
उम्मीदवार ने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं (मैट्रिकुलेशन) पास किया हो।
आयु सीमा (Age Limit):
न्यूनतम आयु: 18 वर्ष
अधिकतम आयु: 27 वर्ष
आरक्षित वर्गों को केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार आयु में छूट प्रदान की जाएगी।
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हवलदार के लिए शारीरिक मानदंड (PET/PST)
मानदंड
पुरुष
महिला
ऊँचाई
157.5 सेमी
152 सेमी
सीना (केवल पुरुष)
76 – 81 सेमी
—
वजन
—
न्यूनतम 48 किलोग्राम
साइक्लिंग
8 किमी – 30 मिनट
3 किमी – 25 मिनट
पैदल चाल
1600 मीटर – 15 मिनट
1 किमी – 20 मिनट
चयन प्रक्रिया (Selection Process)
1. कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT)
2.शारीरिक दक्षता / मापदंड परीक्षा (केवल हवलदार के लिए)
3.दस्तावेज़ सत्यापन
4.चिकित्सा परीक्षण (Medical Test)
कैसे करें आवेदन?
उम्मीदवार SSC की आधिकारिक वेबसाइट https://ssc.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को अपना फोटो, हस्ताक्षर, दस्तावेज़ और आधार कार्ड स्कैन करके तैयार रखना होगा।
किसी भी त्रुटि से बचने के लिए नोटिफिकेशन को ध्यानपूर्वक पढ़ें।
सैलरी और सुविधाएं
SSC MTS और हवलदार पदों पर चयनित उम्मीदवारों को 7वें वेतन आयोग के अनुसार वेतन मिलेगा। इसमें बेसिक पे, DA, HRA और अन्य भत्ते शामिल हैं।
पद
वेतनमान
MTS
₹18,000 – ₹22,000 प्रतिमाह (लगभग)
हवलदार
₹21,700 – ₹69,100 प्रतिमाह (Level 3)
इसके अलावा मेडिकल सुविधा, ग्रेच्युटी, पेंशन और प्रमोशन की सुविधा भी मिलती है।
हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने एक बेहद अहम खुलासा किया है, जो सभी दोपहिया वाहन चलाने वालों के लिए राहत लेकर आया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि दोपहिया वाहनों (Motorcycles, Scooters) को फास्टैग की आवश्यकता नहीं है। यह बयान उन करोड़ों लोगों के लिए बेहद सुकूनभरा है जो रोज़ाना अपनी बाइक या स्कूटर से राष्ट्रीय राजमार्गों या अन्य सड़कों से होकर गुजरते हैं।
अगर आप जानना चाह रहे हैं कि यह नियम क्या है, कब से लागू है, आगे क्या बदलाव हो सकते हैं और सरकार का क्या प्लान है|
क्या है फास्टैग नियम?
फास्टैग (FASTag) एक इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम है, जो रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक का उपयोग कर टोल प्लाज़ा से शुल्क स्वतः ले लेता है। यह वर्तमान में सभी चार पहिया और भारी वाहनों जैसे कि कार, बस, ट्रक इत्यादि के लिए जरूरी है।
नितिन गडकरी का बयान
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मीडिया से बातचीत में यह स्पष्ट किया है:
“दोपहिया वाहनों के लिए फास्टैग जरूरी नहीं है, क्योंकि उनपर राष्ट्रीय राजमार्गों या टोल प्लाज़ा से शुल्क लागू ही नहीं होता।”
यानी अगर आप दोपहिया वाहन चला रहे हैं तो आपको फास्टैग लगवाने या रिचार्ज कराने की आवश्यकता नहीं है।
किसके लिए जरूरी है फास्टैग?
फास्टैग जरूरी है: 1.चार पहिया वाहन (कार, जीप, वैन) 2.भारी वाहन (बस, ट्रक, ट्रेलर) 3.कॉमर्शियल वाहन
फास्टैग जरूरी नहीं है: दोपहिया वाहन (बाइक, स्कूटर, मोपेड)
क्यों दोपहिया वाहनों को दी गई है छूट?
भारत में दोपहिया वाहन सबसे लोकप्रिय साधनों में से एक है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोग इसका उपयोग करते हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे के टोल सिस्टम में दोपहिया वाहनों को कभी शुल्क के दायरे में लाने का नियम नहीं बनाया गया, इसलिए इनके लिए फास्टैग की आवश्यकता भी नहीं है।केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय लगातार तकनीक और नियमों में बदलाव कर रहा है, ताकि यात्रियों को सुविधा मिले।भविष्य में अगर नियमों में बदलाव हुआ तो उसकी सूचना सभी मीडिया चैनलों और सरकारी वेबसाइटों के जरिए दी जाएगी।वर्तमान में दोपहिया वाहनों को टोल शुल्क से पूरी छूट दी गई है।
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देशभर में फास्टैग का असर
2019 में लागू होने के बाद से फास्टैग ने देशभर में ट्राफिक जाम कम किया है।
वाहनों का टोल शुल्क स्वतः कटने से टोल प्लाज़ा पर प्रतीक्षा समय कम हुआ है।
अब लगभग 95% चार पहिया या भारी वाहन फास्टैग उपयोग कर रहे हैं।
लेकिन दोपहिया वाहनों के लिए यह पूरी तरह से राहत है कि वे बिना फास्टैग या शुल्क के राष्ट्रीय राजमार्गों से गुजर सकते हैं।ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञों का कहना है कि यह नीति दोपहिया सवारों को राहत देती है और देशभर में बाइक और स्कूटर उपयोग को प्रोत्साहित करती है, खासकर मध्यम एवं निम्न आय वर्ग में।भविष्य में अगर दोपहिया वाहनों के लिए टोल नीति लागू करने का प्रस्ताव आता है तो उसपर गहन अध्ययन किया जाएगा, और तब तक यह नियम लागू नहीं होगा।
क्या बाइक या स्कूटर के लिए फास्टैग जरूरी है?
नहीं, दोपहिया वाहन यानी बाइक या स्कूटर के लिए फास्टैग जरूरी नहीं है।
क्या बाइक से राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने का शुल्क लगेगा?
वर्तमान नियमों के अनुसार दोपहिया वाहनों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।
क्या भविष्य में दोपहिया वाहनों के लिए फास्टैग लागू होगा?
फिलहाल ऐसा कोई नियम नहीं है। अगर कभी नियम में बदलाव हुआ तो सरकार आधिकारिक सूचना जारी करेगी।
फास्टैग कब से लागू है?
फास्टैग प्रणाली 2019 में पूरे देश में लागू की गई थी।
बिहार के ग्रामीण विकास और मूलभूत सुविधाओं में इजाफा करने के मकसद से नीतीश कुमार की सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य मंत्रिपरिषद ने एक साथ 46 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिनके तहत राज्य की सभी 8053 पंचायतों में 50 लाख रुपये खर्च कर विवाह भवन का निर्माण किया जाएगा। यह फैसला ग्रामीण बिहार में शादी-विवाह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के लिए समर्पित स्थान उपलब्ध कराने में सहायक होगा।
क्या है पूरी योजना?
नीतीश सरकार के इस फैसले के तहत बिहार राज्य की सभी पंचायतों में विवाह भवन बनाया जाएगा। राज्य मंत्रिपरिषद ने कुल मिलाकर 4026 करोड़ रुपये की इस महत्त्वाकांक्षी योजना को सहमति दी है। इसके तहत:
यह सभी विवाह भवन पंचायत स्तर पर लोगों के उपयोग के लिए उपलब्ध होंगे, ताकि उन्हें शादी और अन्य सांस्कृतिक आयोजनों के लिए शहर या निजी स्थानों का सहारा न लेना पड़े।
प्रत्येक पंचायत में 50 लाख रुपये खर्च कर विवाह भवन बनाया जाएगा।
राज्य की कुल 8053 पंचायतें इस योजना में शामिल होंगी।
नीतीश सरकार का यह फैसला विशेष तौर पर ग्रामीण बिहार के लोगों को ध्यान में रखकर लिया गया है। इससे:
पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीण लोगों को सांस्कृतिक आयोजनों, बैठकों और मेलों के लिए मिलेगा समर्पित स्थान।
गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को मिलेगा फायदा।
सभी धर्म और समुदाय के लोग विवाह भवन का उपयोग कर सकेेंगे।
विवाह भवन बनाने का उद्देश्य
नीतीश कुमार सरकार का यह फैसला ग्रामीण बिहार में मूलभूत सुविधाओं में व्यापक बदलाव लाने और सांस्कृतिक समरसता को बढ़ावा देने का हिस्सा है।
राज्य में समावेशी विकास और सामुदायिक मेलजोल को प्रोत्साहन मिलेगा।
ग्रामीण लोगों को सांस्कृतिक, सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों के लिए समर्पित स्थान मिलेगा।
विवाह भवन के निर्माण से राज्य की पंचायतें आत्मनिर्भर होंगी, जिससे वे निजी या महंगे स्थानों का सहारा लेने से बचेंगी।
योजना कब से होगी लागू?
नीतीश सरकार का यह ऐतिहासिक फैसला तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। राज्य सरकार जल्द ही सभी पंचायतों में विवाह भवन बनाने के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू करेगी। इसके बाद योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा और अगले दो साल में सभी पंचायतों में यह निर्माण कार्य पूर्ण होने का अनुमान है।
राज्य और पंचायतों को होगा सीधा फायदा
ग्रामीण लोगों को कम खर्च में शादी और अन्य आयोजन करने का अवसर मिलेगा।
पंचायतों में मूलभूत सुविधाएं मजबूत होंगी।
राज्य में समरसता, भाईचारे और सांस्कृतिक मेलजोल को बढ़ावा मिलेगा।
पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीण प्रशासन को सशक्त बनाया जाएगा।
बिहार में समावेशी और सतत विकास का मॉडल स्थापित होगा।
CM ने X पर शेयर की जानकारी
इसकी जानकारी देते हुए सीएम नीतीश कुमार ने X पर लिखा, ‘मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमारी सरकार राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह कार्यक्रम में सुविधा के लिए सभी पंचायतों में विवाह भवन का निर्माण कराएगी.
मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमारी सरकार राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह कार्यक्रम में सुविधा के लिए सभी पंचायतों में विवाह भवन का निर्माण कराएगी। आज कैबिनेट में ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह मंडप योजना’ की मंजूरी दे दी गई है। पंचायतों में विवाह…
भारत का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), हर साल हजारों युवाओं को प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) बनने का मौका देता है। इस साल यानी 2025 में SBI ने 541 पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें 500 नियमित और 41 बैकलॉग पद शामिल हैं। यह भर्ती उन सभी स्नातक पास युवाओं के लिए है जो बैंकिंग क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित करियर बनाना चाहते हैं।
नोट: यह शुल्क रिफंडेबल नहीं है और केवल ऑनलाइन भुगतान किया जाएगा।
SBI PO शैक्षणिक योग्यता और उम्र सीमा
शिक्षा: स्नातक डिग्री (किसी भी विषय में) मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से।
अंतिम वर्ष के छात्र: आवेदन कर सकते हैं, अगर वे इंटरव्यू तक डिग्री प्रमाणपत्र पेश कर सके।
आयु सीमा: न्यूनतम 21 वर्ष और अधिकतम 30 वर्ष।
(एससी/एसटी/ओबीसी/पीडब्ल्यूबीडी/भूतपूर्व सैनिक के लिए सरकारी पदों पर छूट दी जाएगी।)
SBI PO सिलेक्शन प्रोसेस 2025
चयन प्रक्रिया तीन चरणों में होगी:
अंतिम चयन में मेन्स और इंटरव्यू के अंक जोड़े जाएंगे
1.प्रारंभिक परीक्षा (Prelims):
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवार मुख्य परीक्षा में बैठेंगे
2मुख्य परीक्षा (Mains):
वस्तुनिष्ठ और वर्णनात्मक प्रश्न
लगभग रिक्तियों से 3 गुना उम्मीदवार आगे बढ़ेंगे
3.मनोवैज्ञानिक टेस्ट, ग्रुप एक्सरसाइज और इंटरव्यू:
SBI PO नोटिफिकेशन 2025 PDF डाउनलोड लिंक
आधिकारिक नोटिफिकेशन पढ़ने के लिए और परीक्षा पैटर्न, सिलेबस, परीक्षा केंद्र व अन्य जानकारियाँ प्राप्त करने के लिए आप SBI की आधिकारिक वेबसाइट से नोटिफिकेशन डाउनलोड कर सकते हैं।
आवेदन करने के लिए आप SBI के करियर पोर्टल या सीधा लिंक उपयोग कर सकते हैं: 👉 SBI PO Apply Online
BCECEB DCECE Counselling 2025: बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (BCECEB) ने डिप्लोमा सर्टिफिकेट प्रवेश परीक्षा (DCECE) 2025 के लिए ऑनलाइन काउंसलिंग का शेड्यूल जारी कर दिया है। यह काउंसलिंग बिहार के सरकारी और निजी पॉलिटेक्निक (इंजीनियरिंग) कॉलेजों में एडमिशन के लिए आयोजित की जाएगी। अगर आप DCECE परीक्षा में सफल हुए हैं और काउंसलिंग में हिस्सा लेना चाहते हैं तो यह लेख आपको पूरी प्रक्रिया, जरूरी डॉक्यूमेंट और च्वाइस फिलिंग से जुड़ी सभी जानकारियाँ देगा।
BCECEB DCECE काउंसलिंग 2025 का शेड्यूल
बिहार पॉलिटेक्निक काउंसलिंग 2025 में हिस्सा लेने वाले छात्रों के लिए काउंसलिंग का शेड्यूल BCECEB की आधिकारिक वेबसाइट bceceboard.bihar.gov.in पर जारी किया गया है। परीक्षा में सफल सभी छात्रों को ऑनलाइन च्वाइस फिलिंग करनी होगी, जिसमें वे अपने पसंदीदा कॉलेज और ब्रांच का चुनाव करेंगे।च्वाइस फिलिंग और लॉकिंग का कार्यक्रम जल्द ही वेबसाइट के जरिए जारी किया जाएगा। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे नियमित रूप से BCECEB की आधिकारिक साइट चेक करते रहें, ताकि लेटेस्ट अपडेट से वंचित न हों।
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BCECEB DCECE काउंसलिंग में हिस्सा लेने का तरीका
बिहार पॉलिटेक्निक काउंसलिंग में हिस्सा लेने के लिए आपको निम्नलिखित स्टेप्स फॉलो करने होंगे:
1.ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करें:
BCECEB की वेबसाइट bceceboard.bihar.gov.in खोलें और काउंसलिंग रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें।
2.च्वाइस फिलिंग और लॉकिंग:
रजिस्ट्रेशन के बाद आपको अपनी पसंद के कॉलेज और ब्रांच का चुनाव करना होगा। च्वाइस फिलिंग के दौरान ध्यान रखें कि आप अपनी प्राथमिकता सही क्रम में भरें। च्वाइस फिलिंग पूरी होने के बाद उसे लॉक करना जरूरी है, वरना च्वाइस कंसीडर नहीं की जाएगी।
3.सीट अलॉटमेंट:
च्वाइस फिलिंग और लॉकिंग के आधार पर सीट अलॉटमेंट लिस्ट जारी की जाएगी। अगर आपको सीट मिलती है तो आपको अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड करना होगा।
4.डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन:
अलॉटमेंट लेटर प्राप्त करने के बाद आपको सभी जरूरी डॉक्यूमेंट लेकर निर्धारित केंद्रों पर जाना होगा। वहां डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन किया जाएगा।
5.एडमिशन प्रोसेस पूरी करें
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद आपको संबंधित कॉलेज में एडमिशन लेना होगा और शुल्क जमा करना होगा।
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में ले जाने होंगे ये जरूरी डॉक्यूमेंट
काउंसलिंग में हिस्सा ले रहे छात्रों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए निम्नलिखित डॉक्यूमेंट साथ ले जाने होंगे:
डिप्लोमा सर्टिफिकेट प्रवेश परीक्षा (DCECE) 2025 का एडमिट कार्ड
रैंक कार्ड
10वीं कक्षा का मार्कशीट और सर्टिफिकेट
आधार कार्ड या कोई अन्य फोटो आईडी प्रूफ
जाति प्रमाणपत्र (अगर लागू हो)
निवास प्रमाणपत्र
जन्मतिथि प्रमाणपत्र
दो पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ
ध्यान दें: सभी डॉक्यूमेंट मूल (Original) और उनकी एक सेट सेल्फ अटेस्टेड कॉपी में ले जाएँ।
अगर अलॉटेड सीट से संतुष्ट नहीं तो क्या करें?
अगर आपको अलॉटेड सीट पसंद नहीं है तो आप आगे के राउंड में हिस्सा ले सकते हैं। इसके लिए आपको काउंसलिंग के अगले राउंड का इंतजार करना होगा और च्वाइस फिलिंग में हिस्सा लेना होगा। सभी राउंड की सूचना आधिकारिक वेबसाइट और नोटिफिकेशन में दी जाएगी।
सोशल मीडिया का दौर पूरी दुनिया में एक क्रांति लेकर आया है। आजकल यह सिर्फ संवाद या जान-पहचान का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह लोगों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का एक प्लेटफॉर्म भी बन गया है। खासकर भारत में सोशल मीडिया अब गांव-गली से लेकर महानगरों तक लोगों का हिस्सा बन गया है। वहीं, देसी अंदाज़ में डांस करने वाली भाभियों का क्रेज सोशल मीडिया के सभी प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक, ट्विटर और टेलीग्राम में तेजी से बढ़ रहा है।
हाल ही में एक देसी भाभी का डांस वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने अपनी आदाओं से सोशल मीडिया का तापमान बढ़ा दिया है। यह वीडियो इंस्टाग्राम के एक लोकप्रिय पेज से साझा किया गया है और इसे देखने वालों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। देसी अंदाज़ में किया गया यह डांस लोगों को बेहद पसंद आ रहा है, और कमेंट बॉक्स में उनकी तारीफें थमने का नाम नहीं ले रहीं।
काले रंग की साड़ी में किया गया दमदार डांस
वीडियो में देसी भाभी काले रंग की साड़ी और हॉट ब्लाउज पहने हुए नजर आती है। साड़ी में उनका अंदाज़ जितना साधारण है, उतनी ही बोल्डनेस डांस में देखने को मिल रही है। वे खुले बालों में सड़क के बीच कमर मटकाती नजर आती है, और राहगीर भी हैरान होकर रुक जाते हैं। यह डांस सोशल मीडिया यूजर्स को बेहद लुभा रहा है और एक के बाद एक वीडियो को शेयर किया जा रहा है।
सोशल मीडिया यूजर्स का रिएक्शन
वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर साझा किया गया, यह तुरंत वायरल होने लगा। इंस्टाग्राम, ट्विटर और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इसे लाखों व्यूज मिल चुके हैं। सोशल मीडिया यूजर्स अपनी प्रतिक्रिया कमेंट बॉक्स में दे रहे हैं और देसी भाभी के डांस और अंदाज़ की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कुछ लोगों ने लिखा है, “भाभी का अंदाज कमाल है”, तो कुछ ने लिखा है, “इन्हें तो फिल्म में होना चाहिए”।
वायरल वीडियो के पीछे का जादू
हैरान करने वाली बात यह है कि यह पहला मामला नहीं है जब देसी भाभियों के डांस या अंदाज वाले वीडियो वायरल हुए हों। सोशल मीडिया के दौर में ऐसी घटनाएं बेहद सामान्य हो गई हैं। कुछ वीडियो साधारण अंदाज़ में होते हैं तो कुछ बेहद बोल्ड अंदाज़ में होते हैं, जो युवाओं और नेटिजन्स को आकर्षित करते हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि सोशल मीडिया एक ऐसा मंच है जहां साधारण व्यक्ति भी अपनी प्रतिभा के दम पर सेलिब्रिटी का दर्जा प्राप्त कर लेता है।
देसी भाभियों का डांस सोशल मीडिया के वर्तमान दौर का एक हिस्सा है। यह वीडियो हमें यह सन्देश देता है कि साधारण व्यक्ति भी अपनी प्रतिभा और अंदाज से सोशल मीडिया का सितारा बन सकता है। यह वायरल डांस वीडियो हमें यह भी सिखाता है कि सोशल मीडिया एक ताकतवर साधन है, जो साधारण लोगों को एक वैश्विक मंच प्रदान कर सकता है। बस जरूरत है तो रचनात्मकता, जोश और जिम्मेदारी निभाने की।
बिहार में भूमि रजिस्ट्री (Land Registration) नियमों में 2025 में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। बिहार राज्य सरकार द्वारा भूमि रजिस्ट्री में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए कुछ नए नियम लागू किए जा रहे हैं। अगर आप बिहार में भूमि रजिस्ट्री करवाने का सोच रहे हैं तो यह लेख आपको पूरी जानकारी देगा कि क्या बदलने वाला है, कब से ये नियम लागू होंगे, किसे फायदा होगा और आपको किन बातों का ध्यान रखना
बिहार भूमि रजिस्ट्री नियम 2025 में प्रमुख बदलाव
अब रजिस्ट्री करवाने वालों को अपना आधार कार्ड और पैन कार्ड देना जरूरी होगा। यह कदम रजिस्ट्री में जालसाजी और बेनामी लेनदेन रोकने के लिए उठाया गया है।नई रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होने वाली है। आप बिहार भूमि पोर्टल (Bihar Bhumi Portal) के जरिए आवेदन करेंगे, और सभी कागजात ऑनलाइन ही जमा कराए जाएंगे। यह प्रक्रिया रजिस्ट्री में दलालों और रिश्वतखोरी को कम करेगी।और रजिस्ट्री से पहले भूमि का सत्यापन अब जरूरी होगा। इसके लिए राजस्व कर्मचारी या अमीन द्वारा ऑन-साइट जांच की जाएगी। इससे नकली रजिस्ट्री और भूमि विवादों में काफी कमी आने की उम्मीद है।सरकार रजिस्ट्री शुल्क और स्टांप ड्यूटी में भी बदलाव कर सकती है। यह बदलाव भूमि के स्थान और मूल्यांकन दर (MVR) के आधार पर होगा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अलग-अलग शुल्क हो सकते हैं।
पीएम किसान 20वीं किस्त: कल किसानों के खाते में हो सकती है किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त, जानें पूरी डिटेल click here
बिहार भूमि रजिस्ट्री नियम 2025 का उद्देश्य क्या है?
सरकार का मकसद है:
रजिस्ट्री प्रक्रिया में दलालों और भ्रष्टाचार को खत्म करना
भूमि लेनदेन में पारदर्शिता लाना
फर्जी रजिस्ट्री और जालसाजी रोकना
भूमि विवाद कम करना
सरकारी राजस्व में वृद्धि
ऑनलाइन रजिस्ट्री प्रक्रिया में क्या-क्या लगेगा?
आधार कार्ड
पैन कार्ड
भूमि का मूल कागज (खाता, खतियान, रसीद)
विक्रेता और खरीदार का फोटो एवं हस्ताक्षर
भूमि का नक्शा
ऑनलाइन आवेदन शुल्क
पुराने नियम और नए नियम में क्या फर्क है?
पहलू
पुराने नियम
नए नियम (2025)
आवेदन
ऑफलाइन
ऑनलाइन
आधार/पैन जरूरी?
जरूरी नहीं
जरूरी
भूमि सत्यापन
बाद में या कभी-कभी
रजिस्ट्री से पहले जरूरी
दलालों का हस्तक्षेप
अधिक
कम या बिल्कुल नहीं
रजिस्ट्री शुल्क
पुराने दरों के आधार
स्थान और मूल्यांकन दर से
बिहार भूमि रजिस्ट्री नियम 2025 राज्य में एक क्रांतिकारी कदम है, जो भूमि लेनदेन में पारदर्शिता और विश्वसनीयता लाएगा। अगर आप बिहार में रजिस्ट्री करवाने की सोच रहे हैं तो 2025 से लागू होने वाले इन नियमों की पूरी जानकारी रखें। सभी कागजात ऑनलाइन उपलब्ध कराएं और दलालों से बचें। यह कदम बिहार में भूमि लेनदेन को पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित बनाएगा!
भारत सरकार की बेहद लोकप्रिय योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan Samman Nidhi) देशभर के करोड़ों किसानों के लिए एक सहारा है। इस योजना का मूल उद्देश्य देश के छोटे और मध्यम किसानों को सीधी आर्थिक मदद देना है, ताकि वे अपनी कृषि आवश्यकताओं को पूरा कर सकेें और उनकी आजीविका में सहूलियत हो सके। अब इस कड़ी में एक और अच्छी खबर सामने आई है – सूत्रों के अनुसार, पीएम किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त जल्द ही किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर होने वाली है।
कब होगी पीएम किसान 20वीं किस्त ट्रांसफर?
मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों से प्राप्त जानकारियों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही बिहार दौरे में सीवान जिले में एक जनसभा करेंगे। इसी कार्यक्रम में वह पीएम किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त ट्रांसफर कर सकते हैं। यह कार्यक्रम 20 जून को आयोजित होने की संभावना है। इसके साथ ही सीवान में प्रधानमंत्री बिहार की कई विकास योजनाओं का शिलान्यास या उद्घाटन भी करेंगे।
हाल ही में फरवरी में पीएम मोदी ने बिहार के भागलपुर में 19वीं किस्त के तहत करीब 22,000 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे, जिसका सीधा लाभ लगभग 9.80 करोड़ किसानों को मिला था। अब तक पीएम किसान योजना के तहत देशभर के किसानों को कुल 3.68 लाख करोड़ रुपये का सीधा लाभ मिल चुका है।
20वीं किस्त में क्या होगा खास?
19वीं किस्त तक 9.60 करोड़ किसानों के खातों में पैसा गया है, और इस बार यानी 20वीं किस्त में लाभान्वित होने वाले किसानों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है। मई में केंद्र सरकार ने ई-केवाईसी (e-KYC) अभियान चलाया था, जो 31 मई तक जारी रहा। इसके तहत उन किसानों का विवरण अपडेट किया गया है, जो अब तक पोर्टल में दर्ज नहीं थे। करीब 20,000 नए किसानों का नाम जोड़ा गया है, जिससे वे भी 20वीं किस्त का लाभ ले सकेेंगें।
2.‘Beneficiary List’ यानी ‘लाभार्थियों की सूची’ के विकल्प का चुनाव करें।
3.राज्य, जिला, उप-जिला, ब्लॉक और गांव का नाम दर्ज करें।
4.इसके बाद ‘Get Report’ बटन दबाएं।
किन किसानों को नहीं मिलेगा पैसा?
हालांकि अधिकांश किसानों को यह किस्त मिलेगी, लेकिन उन किसानों के लिए यह सुविधा उपलब्ध नहीं है जिनका नाम पीएम किसान पोर्टल में दर्ज नहीं है या जिनका ई-केवाईसी नहीं हुआ है। इसके अलावा, कुछ जिलों में तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से यह भुगतान रुक सकता है। यह सलाह दी जाती है कि सभी किसान जल्द से जल्द अपनी ई-केवाईसी पूरी करवा लें ताकि अगली किस्तें सुगमता से मिल सके।
गया: इस साल मानसून के जोर पकड़ते ही बिहार के कई हिस्से बाढ़ से प्रभावित हो रहे हैं। गया जिले से होकर बहने वाली प्रसिद्ध फल्गु नदी इस बार बाढ़ के उफान पर है, जिससे आसपास के इलाके में अफरातफरी मची हुई है। इस अचानक आई बाढ़ के कारण नदी के किनारे बसे कई लोग पानी के तेज बहाव में बह गए, जिनमें से अधिकांश लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन, एसडीआरएफ (State Disaster Response Force) और एनडीआरएफ (National Disaster Response Force) की टीमें मौके पर जुटी हुई हैं, ताकि जल्द से जल्द राहत और बचाव कार्य पूरा किया जा सके।
बाढ़ का कारण
फल्गु नदी में आई इस बाढ़ के पीछे मुख्य कारण भारी मानसूनी बारिश है, जो पिछले कुछ दिनों से लगातार जारी है। गया जिले में इस साल औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की जा रही है, जिससे नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि हुई। विशेष रूप से नदी के तटीय इलाकों में जलस्तर इतना तेजी से बढ़ा कि लोग सुरक्षित स्थान पर पहुंचने से पहले ही पानी की चपेट में आ गए।
बताया जा रहा है कि जलग्रहण क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश के चलते नदी में पानी का प्रवाह अचानक तेज हो गया, जिसके कारण प्रशासन को स्थिति संभालने में चुनौती का सामना करना पड़ा।
प्रभावित इलाके
फल्गु नदी के दोनों किनारों पर स्थित गाँव इस बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के पानी ने खेतों, घरों, और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया है। लोग अपने मवेशियों, सामान, और अन्य कीमती चीज़ें छोड़कर सुरक्षित स्थान की ओर भागने को मजबूर हो गए।
गया जिले के प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में अलर्ट जारी किया है और वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। कुछ गांवों में तो राहत शिविर लगाए जा चुके हैं, जहां प्रभावित लोग अस्थायी रूप से ठहर सकते हैं।
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लापता लोगों की स्थिति
अभी तक की रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बाढ़ में कई लोग पानी में बह गए हैं। इनमें बच्चे, महिलाएँ, और बुजुर्ग शामिल हैं। प्रशासन के अनुसार, लापता व्यक्तियों की सटीक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है, क्योंकि प्रभावित इलाकों से संपर्क करना मुश्किल हो रहा है।
स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य में तेजी लाते हुए गोताखोरों की मदद से लापता लोगों की खोज शुरू कर दी है। एसडीआरएफ व एनडीआरएफ के जवान मोटरबोट से नदी में उतरकर लापता व्यक्तियों को ढूंढने में जुटे हुए हैं।
गया के जिलाधिकारी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि प्रशासन की प्राथमिकता अभी प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना है। इसके अलावा, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, भोजन, पानी और दवाइयों की व्यवस्था की जा रही है।
प्रशासन के प्रयास
फल्गु नदी में आई इस बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन लगातार सतर्क है। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी खुद मौके पर मौजूद हैं और राहत व बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। प्रभावित इलाकों में अस्थायी राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां लोगों को सुरक्षित स्थान पर रखा जा रहा है।
इसके साथ ही, प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है ताकि लोग बाढ़ से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए संपर्क कर सकें। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे नदी के किनारे न जाएं, सतर्क रहें, और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस बार की बाढ़ ने उन्हें अचानक चपेट में लिया है। एक ग्रामीण ने बताया, “हमें अनुमान नहीं था कि पानी इतनी तेजी से आएगा। कुछ ही मिनटों में नदी उफन पड़ी, और हम सब भागने लगे। इस अफरातफरी में कई लोग लापता हो गए हैं। हम प्रशासन से मदद की गुहार कर रहे हैं ताकि हमारे परिजन जल्द से जल्द मिल सकें।”
गाँव के अन्य लोग राहत शिविरों में सुरक्षित पहुँच चुके हैं, लेकिन वे अपनी संपत्तियों के नुकसान से दुखी हैं। खेत-खलिहान, घर-गृहस्थी, मवेशी – सब कुछ इस बाढ़ में तबाह हो गया है।
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