बिहार सरकार के कृषि विभाग ने राज्य के किसानों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब किसानों की जमीन, फसल और योजनाओं से जुड़ी जानकारी को फार्मर रजिस्ट्री के तहत एकत्र किया जाएगा, जिससे प्रत्येक किसान की यूनिक फार्मर आईडी बनाई जाएगी। इस पहल का उद्देश्य किसानों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिलाना, पारदर्शिता बढ़ाना और फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगाना है।कृषि विभाग के अनुसार, फार्मर रजिस्ट्री लागू होने के बाद किसानों से जुड़ा डेटा व्यवस्थित होगा और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। यह व्यवस्था भविष्य की कृषि नीतियों और योजना निर्माण में भी अहम भूमिका निभाएगी।
फार्मर रजिस्ट्री क्या है, इससे किसानों को क्या होगा फायदा
फार्मर रजिस्ट्री एक डिजिटल डेटाबेस सिस्टम है, जिसमें राज्य के प्रत्येक किसान की व्यक्तिगत और कृषि संबंधी जानकारी दर्ज की जाएगी। इसमें किसान का नाम, पता, जमीन का विवरण, फसल का प्रकार, बैंक खाता और आधार से जुड़ी जानकारियाँ शामिल होंगी।
इस रजिस्ट्री के तहत हर किसान को एक फार्मर आईडी नंबर मिलेगा, जो उसकी पहचान बनेगा। इसके जरिए किसान को बार-बार दस्तावेज देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकारी योजनाओं में आवेदन करते समय फार्मर आईडी ही पर्याप्त होगी।
कृषि विभाग का मानना है कि अब तक कई योजनाओं में सही किसानों तक लाभ नहीं पहुंच पाता था। कहीं डेटा अधूरा होता था, तो कहीं गलत जानकारी के कारण पात्र किसान वंचित रह जाते थे। फार्मर रजिस्ट्री इस समस्या का स्थायी समाधान साबित हो सकती है।
फार्मर रजिस्ट्री से किसानों को मिलने वाले प्रमुख लाभ:
- सभी योजनाओं का लाभ एक ही आईडी से
- फर्जी और दोहरे लाभार्थियों पर रोक
- योजनाओं की राशि सीधे बैंक खाते में
- समय की बचत और प्रक्रिया में पारदर्शिता
- छोटे और सीमांत किसानों की पहचान आसान
सरकार का लक्ष्य है कि राज्य का कोई भी पात्र किसान योजनाओं से वंचित न रहे।
ग्राम स्तर पर लगेगा कैंप, ऐसे बनेगी फार्मर आईडी
फार्मर आईडी बनाने के लिए कृषि विभाग द्वारा ग्रामवार रजिस्ट्रेशन कैंप लगाए जाएंगे। इन कैंपों में कृषि समन्वयक, कृषि सलाहकार और अन्य कर्मचारी मौजूद रहेंगे, जो किसानों का पंजीकरण करेंगे।
कैंप में किसान से निम्न दस्तावेज लिए जाएंगे:
- आधार कार्ड
- जमीन से जुड़े कागजात
- बैंक पासबुक
- मोबाइल नंबर
इन दस्तावेजों के आधार पर किसान की जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जाएगी और सत्यापन के बाद फार्मर आईडी जनरेट की जाएगी। जिन किसानों के पास डिजिटल साधनों की जानकारी नहीं है, उनके लिए यह कैंप बेहद उपयोगी साबित होंगे।
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि फार्मर आईडी बनवाने में किसानों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया सरकार द्वारा निःशुल्क कराई जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के लिए पंचायत स्तर पर प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसान इस योजना से जुड़ सकें।
योजनाओं का लाभ, नीति निर्माण और कृषि व्यवस्था होगी मजबूत
फार्मर रजिस्ट्री लागू होने के बाद बिहार की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, बीज अनुदान, खाद सब्सिडी और आपदा राहत जैसी योजनाओं का लाभ सीधे फार्मर आईडी से लिंक होकर मिलेगा।
इसके साथ ही सरकार को यह भी स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी कि:
- किस क्षेत्र में कौन-सी फसल उगाई जा रही है
- किस किसान को पहले से कौन-सा लाभ मिला है
- किन जिलों में सहायता की अधिक जरूरत है
इस डेटा के आधार पर सरकार बेहतर नीतियाँ बना सकेगी और संसाधनों का सही उपयोग हो पाएगा।कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फार्मर रजिस्ट्री भविष्य में कृषि से जुड़े सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म का आधार बनेगी। इससे खेती को आधुनिक और डेटा आधारित बनाने में मदद मिलेगी।
किसान कॉल सेंटर से लें सहायता
फार्मर रजिस्ट्री या फार्मर आईडी से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए किसान किसान कॉल सेंटर पर संपर्क कर सकते हैं।किसान कॉल सेंटर नंबर: 1800-180-1551 समय: सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक|









































