Bihar Exit Poll Result 2025 Live:बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का माहौल पूरे राज्य में गरमाया हुआ है। दोनों चरणों का मतदान संपन्न हो चुका है और अब जनता की निगाहें एग्जिट पोल के नतीजों पर टिकी हैं। इस बार बिहार में चुनाव दो चरणों में हुए—पहला चरण 6 नवंबर को और दूसरा चरण 11 नवंबर को। दोनों चरणों में रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग हुई है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि मतदाताओं ने सत्ता परिवर्तन या स्थिरता के लिए स्पष्ट मन बना लिया है। जैसे ही मतदान समाप्त हुआ, विभिन्न टीवी चैनलों और सर्वे एजेंसियों ने अपने एग्जिट पोल जारी करने शुरू कर दिए। इन सभी सर्वेक्षणों में एक बात समान दिख रही है—राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की जबरदस्त वापसी। सात अलग-अलग एग्जिट पोल्स में एनडीए को भारी बहुमत मिलते हुए दिखाया गया है जबकि महागठबंधन को पिछड़ता हुआ दिखाया गया है।
पहला चरण: रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग ने बढ़ाई दिलचस्पी
इस बार बिहार में मतदान का उत्साह पहले से कहीं ज्यादा देखने को मिला। पहले चरण में ही मतदान प्रतिशत 65% से अधिक पहुंच गया था, जबकि दूसरे चरण तक कुल मतदान 67.14% तक पहुंच गया, जो पिछले दो दशकों में सर्वाधिक है। 2000 के विधानसभा चुनाव में 62.57% वोटिंग हुई थी और 1998 के लोकसभा चुनाव में 64.6% मतदान दर्ज हुआ था। इस बार का आंकड़ा उन सभी पुराने रिकॉर्ड्स को पार कर गया। यह बढ़ी हुई वोटिंग न केवल मतदाताओं की जागरूकता को दिखाती है बल्कि यह भी संकेत देती है कि जनता किसी निर्णायक परिवर्तन की ओर बढ़ रही है। मतदान के दौरान युवा, महिलाएं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं की सक्रियता ने बिहार के इस चुनाव को और भी दिलचस्प बना दिया।
राज्य की 243 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान हुआ। पहले चरण में 121 सीटों पर वोट डाले गए, जबकि दूसरे चरण में 122 सीटों पर। एनडीए ने इस चुनाव में बीजेपी, जेडीयू, लोजपा (रामविलास) और हम (हिंदुस्तान आवाम मोर्चा) के साथ मिलकर मोर्चा संभाला, वहीं महागठबंधन की अगुवाई राजद के तेजस्वी यादव ने की जिसमें कांग्रेस, वामदल और अन्य शामिल थे। तीसरे मोर्चे के तौर पर प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी मैदान में थी, जिसने कई सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे लेकिन उसे प्रभावशाली समर्थन नहीं मिला।
एग्जिट पोल्स का रुझान: सातों सर्वे में NDA को बढ़त
जैसे ही दूसरे चरण की वोटिंग खत्म हुई, एग्जिट पोल्स की बाढ़ आ गई। सबसे पहले MATRIZE-आईएएनएस का एग्जिट पोल सामने आया, जिसमें NDA को 147 से 167 सीटें और महागठबंधन को 70 से 90 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया। वोट शेयर की बात करें तो एनडीए को 48%, महागठबंधन को 37% और अन्य दलों को 15% वोट मिलने की संभावना जताई गई है। यह सर्वे बताता है कि ग्रामीण इलाकों और महिलाओं का वोट एनडीए के पक्ष में गया है।
इसके बाद JVC एजेंसी का एग्जिट पोल आया जिसमें भी एनडीए को 135-150 सीटें और महागठबंधन को 88-103 सीटें मिलती दिखाई गईं। इसी तरह पीपल्स इंसाइट ने अपने सर्वे में एनडीए को 133-148 सीटें, महागठबंधन को 87-102 सीटें और अन्य को 3-6 सीटें दी हैं। यह सर्वे भी दर्शाता है कि जनता ने नीतीश कुमार के शासन में विश्वास बनाए रखा है।
POLSTRAT एजेंसी के सर्वे के अनुसार, एनडीए को 133-148 सीटें, महागठबंधन को 87-102 और अन्य को 3-5 सीटें मिल सकती हैं। पार्टीवार विश्लेषण में बीजेपी को 68-72 सीटें, जेडीयू को 55-60, लोजपा (रामविलास) को 9-12, हम को 1-2 और आरएलएम को 0-2 सीटें मिलने की उम्मीद जताई गई है। यह सर्वे बताता है कि भाजपा-जेडीयू गठबंधन के बीच सीटों का तालमेल जनता को भाया है।
चाणक्य STRATEGIES का एग्जिट पोल भी इसी लाइन पर चला। इसमें एनडीए को 130-138 सीटें, महागठबंधन को 100-108 सीटें और अन्य को 3-5 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं Peoples Pulse के सर्वे में एनडीए को 133-159, महागठबंधन को 75-101, जेएसपी को 0-5 और अन्य को 2-8 सीटें दी गई हैं।
सबसे ताजा सर्वे डीवी रिसर्च का आया है, जिसमें एनडीए को 137-152, महागठबंधन को 83-98, जनसुराज को 2-4 और ओवैसी की पार्टी AIMIM को 0-2 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। सातों एग्जिट पोल्स का औसत (Polls of Polls) निकालें तो तस्वीर साफ हो जाती है—एनडीए को 138 से 155 सीटों का बहुमत मिल रहा है जबकि महागठबंधन 82-98 सीटों पर सिमट सकता है। इसका मतलब है कि जनता ने नीतीश कुमार और बीजेपी पर एक बार फिर भरोसा जताया है।
NDA की संभावित वापसी और नीतीश कुमार की बढ़त
एग्जिट पोल के आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि बिहार की जनता अभी भी स्थिर सरकार चाहती है। पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य के बीच तालमेल ने नीतीश कुमार की छवि को मज़बूत किया है। पीएम नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और केंद्र की योजनाओं ने ग्रामीण वोटरों में एनडीए के पक्ष में माहौल बनाया।
राज्य में महिला वोटरों की भागीदारी में भारी वृद्धि हुई, और यह वर्ग परंपरागत रूप से नीतीश कुमार के समर्थन में माना जाता है। ‘मुख्यमंत्री साइकिल योजना, कन्या उत्थान योजना और पोषण योजना जैसी योजनाओं का असर महिला वोट बैंक पर साफ दिखाई दे रहा है। वहीं युवाओं के बीच मोदी सरकार की योजनाओं जैसे स्टार्टअप इंडिया और प्रधानमंत्री रोजगार योजना ने भी असर डाला है।
दूसरी ओर महागठबंधन नेतृत्व की अस्थिरता और आंतरिक मतभेदों के कारण जनता का भरोसा डगमगाता दिखाई दिया। तेजस्वी यादव की सभाओं में भीड़ तो रही, लेकिन वह वोटों में पूरी तरह तब्दील होती नजर नहीं आई। एग्जिट पोल्स में महागठबंधन को 100 के भीतर रखा गया है, जो यह बताता है कि विपक्षी गठबंधन इस बार भी जनता को निर्णायक रूप से आकर्षित नहीं कर पाया।
एनडीए के भीतर भी इस बार सीट शेयरिंग का फॉर्मूला सटीक रहा। बीजेपी ने 53 सीटों पर चुनाव लड़ा, जेडीयू ने 44 पर, लोजपा (रामविलास) ने 15 पर और हम ने 6 पर। यह तालमेल मतदाताओं के लिए एक संतुलित और एकजुट गठबंधन की छवि बना सका।
अब सबकी नजरें मतगणना के दिन पर
हालांकि एग्जिट पोल्स केवल अनुमान हैं, असली तस्वीर 14 नवंबर को सामने आएगी जब मतगणना के बाद अंतिम परिणाम घोषित होंगे। बिहार की 243 सीटों में बहुमत का आंकड़ा 122 है। अगर एग्जिट पोल्स सही साबित हुए, तो नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर एनडीए की सरकार बनती है तो यह नीतीश कुमार के शासन मॉडल और प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे की संयुक्त सफलता मानी जाएगी। वहीं अगर महागठबंधन चमत्कार कर पाता है तो यह विपक्षी राजनीति के पुनर्जागरण का संकेत होगा।
बिहार के चुनाव परिणाम हमेशा राष्ट्रीय राजनीति पर गहरा असर डालते हैं। इस बार भी पूरे देश की निगाहें इस चुनाव पर टिकी हैं, क्योंकि बिहार का राजनीतिक रुझान अक्सर लोकसभा चुनावों के लिए संकेत माना जाता है।
राज्य में इस बार जनसुराज पार्टी (प्रशांत किशोर) और ओवैसी की AIMIM जैसे दलों की सीमित उपस्थिति ने मुकाबले को दिलचस्प जरूर बनाया है, लेकिन निर्णायक नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन छोटी पार्टियों के वोट विभाजन से महागठबंधन को नुकसान हुआ और इसका फायदा सीधा एनडीए को मिला।
एग्जिट पोल्स में NDA की बंपर वापसी, पर असली फैसला 14 नवंबर को
कुल मिलाकर, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के एग्जिट पोल्स ने एनडीए की बंपर वापसी की भविष्यवाणी कर दी है। सातों एग्जिट पोल्स में एक समान पैटर्न दिखाई देता है—जनता ने एक बार फिर नीतीश कुमार को मौका देने का संकेत दिया है। बिहार में रिकॉर्डतोड़ वोटिंग, महिलाओं की सक्रियता और केंद्र-राज्य की योजनाओं का प्रभाव एनडीए के पक्ष में जाता दिख रहा है।
फिर भी लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि अंतिम फैसला मतगणना के दिन जनता ही करती है। इसलिए अब सबकी निगाहें 14 नवंबर पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि बिहार की सत्ता की बागडोर किसके हाथों में जाएगी — नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन या तेजस्वी यादव का महागठबंधन।
एक बात तय है, इस बार बिहार के चुनाव ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और यह नतीजे आने वाले कई महीनों तक राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करेंगे।






















